October 1, 2026
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औषधीय पौधे एवं संभावनाएं विषय पर व्याख्यान दिया

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औषधीय पौधे के बिना जीवन सुरक्षित नहीं है: प्रोफेसर ललित तिवारी

नैनीताल सरोवर नगरी में कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ ललित तिवारी ने डी डी यू विश्वविद्यालय गोरखपुर द्वारा आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में औषधीय पौधे एवं संभावनाएं विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ तिवारी ने कहा कि औषधीय पौधे के बिना जीवन सुरक्षित नहीं है । सुमिरन सभ्यता से शुरुआत हुए इन पर एबर्स पापुरस तथा सुश्रुत संहिता ने इनके ज्ञान को आगे बढ़ाया है । आज विश्व में 50 से 70 हजार औषधीय एवं एरोमेटिक पौधे उपलब्ध है । 960 पौधे हाई ट्रेड में है तथा 2025 में 450 बिलियन डॉलर का कारोबार इन औषधीय पौधों का हुआ । भारत चीन के बाद दूसरा देश है जो इसका निर्यात करता है । पारंपरिक ज्ञान से लेकर मॉडर्न मेडिसिन में भी इनका इस्तमाल होता है । उत्तराखंड में 250 औषधीय पौधे है जो व्यापार में प्रयुक्त होते है । अतीश , अजवाइन , सत्वा ,अग्नि , लगली, कुठ ,हत्याजारी , मैदा , महा मैदा, नीर ,बज्रदंती ,हरड़ ,किलमोरा आज भी उतने ही प्रसिद्ध है ।वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार 2050 में औषधीय पौधों का कारोबार 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा तथा प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है । ईसबगोल ,तुलसी , मकाई ,कुमारी , सोन पत्ता ,अश्वगंधा , वासा खेती महत्पूर्ण है । डॉ तिवारी ने कहा कि औषधीय पौधों का संरक्षण जरूरी है । अष्ट वर्ग के 5 पौधे एंडैंजर्ड कैटेगरी में शामिल हो चुके है । डॉ तिवारी ने संरक्षण के लिए आई यू सी एन सहित अन्य संस्थाओं द्वारा की जा रही कोशिश का भी जिक्र किया जिससे जंगलों में इन्हें बचाया जा सके तथा खेती से इसका लाभ ले सके । उत्तराखंड में भी औषधीय पौधों की खेती की अपार संभावनाएं है किन्तु जंगली जानवरों की बढ़ती समस्या इसे हतोत्साही करते है ।इस अवसर पर संयोजक डॉ आर एस चौहान सहित विभिन्न प्रदेशों के प्राध्यापक उपस्थित रहे ।

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