खेल, योग एवं ध्यान से मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन


नैनीताल। सरोवर नगरी में कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के डीएसबी परिसर स्थित हर्मिटेज ऑडिटोरियम में “खेल योग एवं मेडिटेशन विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को गरिमामय समापन हुआ। संगोष्ठी का आयोजन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर स्थित शारीरिक शिक्षा विभाग के सहयोग से किया गया। यह संगोष्ठी भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित तथा फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के नॉलेज पार्टनरशिप में आयोजित की गई।
संगोष्ठी के दूसरे दिन का शुभारंभ इंडोनेशिया की योग्याकार्ता स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वावन एस. सुहेरमन के मुख्य व्याख्यान से हुआ। उन्होंने समकालीन परिस्थितियों में शारीरिक गतिविधियों एवं शारीरिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन पर व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए बताया कि बदलती जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक है।
इसके पश्चात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विक्रम सिंह ने पूर्ण सत्र में “योग क्यों विषय पर अपने विचार रखते हुए वर्तमान समय में खेल, योग एवं ध्यान की प्रासंगिकता, आवश्यकता तथा मानव कल्याण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. मुकुल पंत ने खाद्य साक्षरता एवं उसके विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए संतुलित आहार, पोषण संबंधी जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को समझाया। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के भगिनी निवेदिता महाविद्यालय की प्रोफेसर ममता सहरावत ने शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में अपने व्यावहारिक अनुभवों एवं विभिन्न क्रियात्मक प्रयासों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार शारीरिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा आत्मविश्वास, अनुशासन और समग्र व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
समापन सत्र में नैनीताल नगर पालिका की अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। डीएसबी परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय के निदेशक प्रोफेसर संजय पंत सहित विभिन्न शिक्षाविदों एवं गणमान्य अतिथियों ने भी सहभागिता की। मंच पर प्रोफेसर राजीव चौधरी, प्रोफेसर बृज भूषण सिंह, प्रोफेसर जटिन सोनी तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर पुष्पेश कुमार पांडेय सहित अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद उपस्थित रहे। डॉ सरस्वती खेतवाल ने कहा कि जीवन को सरल बनाना हो ,शरीर की रक्षा करनी हो जीवन को आनन्दित करना हो तो योग को अपनाना ही पड़ेगा । योग जीवन की आधार पूंजी है । प्रॉफ संजय पंत ने कहा कि योग भारत द्वारा दिया गया मानव जाति के लिए श्रेष्ठ ज्ञान है । प्रॉफ पुष्पेश पांडे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेमिनार सभी के सहयोग से सम्पन्न हो सका तथा ध्यान हमें विषय पर तल्लीन करता है ।इस अवसर पर डॉ सरस्वती खेतवाल ,डॉ संजय पंत ,डॉ ललित तिवारी ,डॉ पुष्कर बिष्ट , डॉ ममता सहरावत सहित डॉ संदीप को शॉल उड़ाकर तथा हिमालय का चित्र भेज कर सम्मानित किया गया ।
समापन अवसर पर दो दिवसीय संगोष्ठी की विस्तृत प्रतिवेदन रिपोर्ट डॉ. राहुल चंद्र द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने संगोष्ठी के प्रमुख विमर्शों, शैक्षणिक उपलब्धियों, विशेषज्ञों के विचारों तथा भविष्य के लिए अपेक्षित कार्ययोजना को रेखांकित किया। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. संतोष कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का संचालन कुमाऊँ विश्वविद्यालय के निदेशक विजिटिंग प्रोफेसर वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर तिवारी ने किया।
संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रख्यात शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। दो दिनों तक चले शैक्षणिक विमर्श में खेल, योग, ध्यान, पोषण, शारीरिक शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के परस्पर संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई।
संगोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि खेल, योग एवं ध्यान को केवल शैक्षणिक अथवा खेल गतिविधियों तक सीमित न रखकर शिक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, ताकि स्वस्थ, जागरूक एवं सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में ठोस पहल की जा सके। इस सेमिनार के संयोजक डॉ रुचि साह ने सभी का आभार व्यक्त किया है। इस अवसर पर डॉ निधि पांडे , हर्ष गोयल ,लाल सिंह ,जतिन , आदि उपस्थित रहे।

























