September 22, 2026
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फैकल्टी इंडक्शन कार्यक्रम के विभागाध्यक्ष वनस्पति

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प्रो ललित तिवारी ने जैव विविधता एवं पर्यावरण पर दिया व्याख्यान

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के एम एम टी टी सी में आयोजित फैकल्टी इंडक्शन कार्यक्रम के विभागाध्यक्ष वनस्पति प्रॉफ ललित तिवारी ने जैव विविधता एवं पर्यावरण पर व्याख्यान दिया । डॉ तिवारी ने कहा हम सभी प्राणीमात्र जैव विविधता का एक भाग है तथा हमारा अजैविक घटक से रिश्ता पर्यावरण है । वर्तमान में जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कारक है । जैव विविधता केवल विभिन्नता नहीं है यह हमारे निर्भरता का आधार है । पूरे विश्व में प्रतिदिन ,40 हजार पौधों तथा जंतुओं के प्रजाति का प्रयोग किया जाता रहा है । उन्होंने कहा कि जैव विविधता जेनेटिक ,स्पीशीज तथा इकोसिस्टम तीन प्रकार की होती है जो अल्फ़ा बीटा गामा का निर्माण करते है । डॉ तिवारी ने कहा कि आज की चुनौती पर्यावरण के सतत प्रयोग ,बराबर हिस्से दरी,एवं संरक्षण है । डॉ तिवारी ने कहा कि जैव विविधता जीवन के लिए आवश्यक है किन्तु मानव का व्यवहार उनके प्रति सकारात्मक होना चाहिए। डॉ तिवारी ने कहा कि जैव विविधता एवं रसायन ,जेनेटिक रिसोर्स एवं परागण ,मृदा निर्माण एवं न्यूट्रिएंट साइक्लिंग तथा विश्व की आर्थिकी आपस में जुड़े हुए है जो विश्व की 11 प्रतिशत आर्थिकी का निर्माण भी करते है । आज इनवेसिव प्रजाति ,आवास नुकसान ,अत्यधिक दोहन ,प्रदूषण ,बढ़ती मानव जनसंख्या , जैव विविधता को नुकसान कर रहे है । वर्तमान में लगभग 48600 प्रजाति दुर्लभ हो रही है । उत्तराखंड की जैव विविधता के साथ उन्होंने क्लाइमेट ,केमिस्ट्री ,बायोग्राफिजिक्स ,केमिस्ट्री ,हाइड्रोलॉजी , फिनालॉजी, वाटर शेड तथा इकोसिस्टम के आपसी संबंधों को भी बताया । डॉ तिवारी ने कहा कि हिन्दू कुश पर्वत की दस बड़ी नदियां 3 बिलियन लोगों के भोजन तथा ऊर्जा की व्यवस्था करती है । डॉ तिवारी ने कहा के कानून फॉरेस्ट एक्ट 1980,जैव विविधता एक्ट 2002,वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972,डब्लू डब्लू एफ ,ट्रैफिक ,रेड डाटा बुक ,साइट्स , आई यू सी एन लगातार इनके संरक्षण को कार्यान्वित है हमें सभी को सकारात्मक होकर प्रकृति से सामंजस्य तथा प्रतिदिन पर्यावरण को कुछ समय देना होगा जिससे ग्रीन मिशन में हमारी भूमिका हो सके तथा हम सतत विकास एवं संरक्षण में योगदान कर सके । हमें ऐसा पर्यावरण चाहिए जहां विश्व के पर्यावरण को संरक्षण की जरूरत ही न हो । इस अवसर पर विभिन्य राज्य के 60 सहायक प्राध्यापक , डॉ प्रजापति ,डॉ सेमवाल ,डॉ बोरा ,जतिन आदि उपस्थित रहे।

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