October 1, 2026
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सीआरएसटी इंटर कालेज में 12 से 18 मई तक  आयोजित की जाएगी

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तीन जर्मन  भूवैज्ञानिक भाइयों-एडोल्फ, हरमन और रॉबर्ट श्लागिंटवेट के चित्रों की प्रदर्शनी

 नैनीताल। सरोवर नगरी में  हिमालय क्षेत्र के विविध रूपों को दर्शाने वाले तीन जर्मन  भूवैज्ञानिक भाइयों-एडोल्फ, हरमन और रॉबर्ट श्लागिंटवेट के चित्रों की प्रदर्शनी नैनीताल के सीआरएसटी इंटर कालेज में 12 से 18 मई तक  आयोजित की जाएगी।  आयोजक पहाड़ ट्रस्ट ने  प्रदर्शनी प्रवेश निःशुल्क होगा। प्रदर्शनी में हिमालय के 77 चित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। पहाड़ ट्रस्ट के संस्थापाक प्रो शेखर पाठक ने बताया कि, प्रदर्शनी में पांच चित्रों को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें श्रीनगर में डल झील का मनोरम दृश्य और मेघालय का बोगापानी पुल भी शामिल है। पाठक ने बताया कि, 1854 में, ईस्ट इंडिया कंपनी (ईआईसी) ने भारतीय उपमहा‌द्वीप के चुंबकीय सर्वेक्षण क्लो पूरा करने के लिए तीन जर्मन भूवैज्ञानिकों भाइयों एडोल्फ, हरमन और रॉबर्ट श्लागिंटवेट को काम पर रखा था। पाठक ने बताया कि, श्लागिंटवेइट भाइयों ने यूरोपीय आल्प्स में सावधानीपूर्वक और विलक्षण शोध के लिए प्रतिष्ठा प्राप्त की थी। श्लाजिंटवेट बंधु भारत में अपने सर्वेक्षणों में कैमरे का उपयोग करने वाले पहले यूरोपीय थे, और उन्होंने अपनी तस्वीरों के बहुत कम रिजॉल्यूशन प्रिंट पर पेंटिंग भी बनाई। उन्होंने अपने निष्कर्षों को सात खंडों में प्रकाशितं किया। प्रो पाठक ने बताया कि, 1854 और 1858 के बीच, श्लागिंटवेइट आइयों ने घोड़े की पीठ पर, पैदल और कभी-कभी नावों में अलग-अलग यात्रा की, दक्षिण भारत के पहले हिस्सों को पार किया और बाद में, असम से लद्दाख और बाल्टिस्तान तक, हिमालय के किनारों और खासी पहाड़ियों से लेकर हिमालय पार और भूटान तक।  उन्होंने बताया कि, जर्मन भाइयों के सर्वेक्षण और मानचित्रों ने बाद के मौसम विज्ञान और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य किया था।

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