रामगढ़ स्थित ऐतिहासिक टैगोर टॉप में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की
165वीं जयंती ‘रवींद्र जन्मोत्सव’ के रूप में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं उत्साह के साथ संगोष्ठी आयोजित




नैनीताल। सरोवर नगरी मे शांतिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालय के तत्वावधान में गुरुवार को रामगढ़ स्थित ऐतिहासिक टैगोर टॉप में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती ‘रवींद्र जन्मोत्सव’ के रूप में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। हिमालय की सुरम्य वादियों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और भारतीय चिंतन से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध वेदपाठी कृष्णानंद शास्त्री के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य यजमान प्रो. अतुल जोशी, देवेंद्र ढैला, हेमंत डालाकोटी, डॉ. एस. डी. तिवारी, डॉ. सुरेश डालाकोटी, के.के. पांडेय एवं देवेंद्र बिष्ट ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं हवन संपन्न कर गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत “विश्वमानवता, प्रकृति और भारतीय चेतना के अमर गायक : गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर” विषय पर एक विचारगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का शुभारंभ उत्तराखंड सरकार में राज्य मंत्री एवं शांतिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालय के ट्रस्टी श्री नवीन वर्मा द्वारा गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर नवीन वर्मा ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा, प्रकृति प्रेम और विश्वबंधुत्व के अद्वितीय संवाहक थे। उन्होंने कहा कि आज के समय में टैगोर के विचार मानवता को जोड़ने, प्रकृति के संरक्षण तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं। ट्रस्ट के सचिव प्रो. अतुल जोशी ने कहा कि रामगढ़ की यह भूमि गुरुदेव की साधना और सृजन की साक्षी रही है। हिमालय की शांत वादियों में रहकर गुरुदेव ने प्रकृति और मानव चेतना को जिस संवेदनशीलता से अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि टैगोर का साहित्य भारतीय आत्मा की सार्वभौमिक अभिव्यक्ति है।
इस अवसर पर नई दिल्ली से पधारी डॉ नीलम वर्मा द्वारा रवींद्र संगीत पर आधारित आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर गुरूदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किये गये। विचारगोष्ठी के अंत में ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री देवेंद्र ढैला ने सभी अतिथियों, विद्वानों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुदेव का जीवन भारतीय संस्कृति, ज्ञान, करुणा और सृजनशीलता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शांतिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालय भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय चिंतन से जोड़ने का कार्य करता रहेगा। कार्यक्रम का संचालन श्री देवेंद्र बिष्ट द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के उपरांत ट्रस्ट के प्रन्यासीयों की वार्षिक बैठक का भी आयोजन किया गया, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि गुरूदेव की कर्मभूमि रामगढ़ में प्रस्तावित विश्वभरती केंद्रीय विश्वविद्यालय के सेटलाईट परिसर के निर्माण की यथाशीघ्र स्वीकृति हेतु प्रन्यासीयो का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ धर्मेंद्र प्रधान से मिल कर उनसे परिसर निर्माण हेतु आग्रह करेगा।
इस अवसर पर डॉ एस डी तिवारी, डॉ सुरेश डालाकोटी, के के पांडे, प्रभात मठपाल, हेमंत डालाकोटी, मोहन बोरा, डॉ विनोद जोशी, डॉ. जीवन उपाध्याय, डॉ. अशोक उप्रेती, श्री गिरीश चंद्र डालाकोटी, उपेंद्र ढैला सहित अनेक शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, साहित्यप्रेमी एवं क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





















