October 2, 2026
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कुमाऊं विश्वविद्यालय में होगी 30 मार्च को जल प्रबंधन पर अंतर विषयी संगोष्ठी

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संगोष्ठी का विषय पारंपरिक जल प्रबंधन स्वदेशी ज्ञान और हिमालयी क्षेत्र (भारत-नेपाल) पर

नैनीताल । कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के इतिहास विभाग एवं यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) के संयुक्त तत्वावधान में 30 मार्च (सोमवार) को एक दिवसीय अंतरविषयी संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
संगोष्ठी के आयोजक सचिव प्रो. रीतेश साह के मुताबिक संगोष्ठी का विषय पारंपरिक जल प्रबंधन स्वदेशी ज्ञान और हिमालयी क्षेत्र (भारत-नेपाल) में सतत भविष्य रखा गया है। बताया कि संगोष्ठी मुखयमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत चल रही उनकी एक शोध परियोजना का हिस्सा है जिसमें देवभूमि उत्तराखंड के मानसखंड क्षेत्र तथा नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में पारंपरिक जल प्रबंधन तकनीकों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है।कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित द हर्मिटेज में प्रात: १०0 बजे से आयोजित होगा। संगोष्ठी के मुखय अतिथि के रूप में आईसीआईएमओडी काठमांडू के वरिष्ठ जल संसाधन विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार भुचर उपस्थित रहेंगे जबकि नेपाल के पूर्व मुखयमंत्री राजेन्द्र सिंह रावल मुखय वक्ता के रूप में विचार रखेंगे। इसके अतिरिक्त प्रो. वसुंधा पांडेय (दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. राजेश खरात (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) तथा प्रो. पी.सी. तिवारी (कुमाऊं विश्वविद्यालय) विभिन्न सत्रों में संबोधित करेंगे।संगोष्ठी के समन्वयक व विभागाध्यक्ष इतिहास प्रो. संजय घिल्डियाल ने बताया कि संगोष्ठी का मुखय उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों की प्रासंगिकता को पुनस्र्थापित करना तथा सतत विकास के लिए स्वदेशी ज्ञान को बढ़ावा देना है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से संगोष्ठी में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है।

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