September 26, 2026
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पेश केंद्रिय बजट उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के परिप्रेक्ष्य में

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कई मामलों में निराशाजनक

ग्रीन बोनस” जोकि प्रदेश वासियों का अधिकार है

के नाम पर निराशा हाथ लगी: त्रिभुवन फर्त्याल

नैनीताल। सरोवर नगरी केंद्र सरकार का बजट आते ही नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता व अधिवक्ता त्रिभुवन फर्त्याल ने बजट आने के बाद कहा स्वतंत्र भारत के इतिहास में प्रथम बार दिन रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा 9वीं बार पेश केंद्रिय बजट उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के परिप्रेक्ष्य में कई मामलों में निराशाजनक रहा। आगामी वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड राज्य में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत आम जनमानस ने बहुत अधिक उम्मीद लगा रखी थी किंतु निराशा हाथ लगी। उत्तराखंड राज्य जोकि लगभग 70% वनाच्छादित होने के चलते पूरे उत्तर भारत का “आक्सीजन सिलेंडर” के साथ ही साथ वर्षभर लगभग 94000 करोड़ के मूल्य की वन आधारित सेवा राष्ट्र को प्रदत्त करता है, लेकिन बहुप्रतिक्षित मांग “ग्रीन बोनस” जोकि प्रदेश वासियों का अधिकार है,के नाम पर निराशा हाथ लगी।
उत्तराखंड राज्य विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के सीमांत काश्तकारों की आय वृद्धि हेतु ना ही पर्वतीय क्षेत्र के किसानों की उपज को जंगली जानवरों जैसी विकराल समस्या से संरक्षण हेतु कोई बजट आधारित नीति को संदर्भित किया गया और ना काश्तकारों की कृषि और उद्यान आधारित उपज के भण्डारण सहित विपणन हेतु कोई आधारभूत संरचना विकास के लिए बजट में कोई रूपरेखा या व्यवस्था की गयी। यह स्थापित सिद्धांत है कि उत्पादन वृद्धि हेतु उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता का विकास होना चाहिए,जिस हेतु निम्न आय वर्ग सहित बेरोजगार कुशल एवं अकुशल युवा वर्ग हेतु रोजगार के अवसरों को सृजित करने की कोई स्पष्ट रूपरेखा का बजट में आभाव खिझ उत्पन्न करता है।
देश में सरकारी गैर सरकारी संस्थानों में कुल कार्यरत कर्मचारियों के लगभग 65% कार्यरत कर्मचारी दैनिक वेतनभोगी है, उनके न्यूनतम दैनिक वेतन में वृद्धि की अत्यधिक आशा इस बजट से थी किंतु इस क्षेत्र में भी हाथ खाली रहे।
छोटे व्यापारी जिनका व्यवसाय ई-कॉमर्स व्यवसाय सहित अन्य कारणों के चलते पे-पटरी है उनके सुरक्षित वर्तमान और भविष्य हेतु कोई रोड मैप ना होना , गरीब छोटे व्यापारीयों में रोष उत्पन्न स्वाभाविक है।
उत्तराखंड राज्य की आर्थिकी परोक्ष रूप से पर्यटन पर आधारित है। पर्यटन गतिविधियों की सुगमता एवं सुलभता हेतु राज्य में विशेष कर पर्वतीय पर्यटन नगरी जैसे रानीखेत नैनीताल मसूरी आदि में पर्यटकों के वाहनों हेतु पार्किंग की समुचित व्यवस्था की नितांत आवश्यकता है जिसके चलते न केवल पर्यटकों का अनुभव उत्तराखंड पर्वतीय राज्य को लेकर कड़वा रहता है बल्कि स्थानीय लोगों को भी यातायात जाम के चलते आपात स्थिति से लेकर दैनिक दिनचर्या के कार्यों हेतु बेवजह परेशान होने के लिए विवश होना पड़ता है,इस हेतु भी पर्वतीय राज्यों के लिए वित्त मंत्री द्वारा कोई विशेष पैकेज की घोषणा ना करने के चलते पर्वतीय राज्यों की जनता स्वयं को ठगा सा महसूस कर रही है। यह स्थिति तब है जबकि उत्तराखंड राज्य में सत्तारूढ़ ट्रिपल इंजन सरकार का दावा करते हैं।

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