October 1, 2026
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नैनीताल। ॐ शन्नो देवीर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
ग्रहों में शनि देव को ‘न्याय के देवता’ और ‘कर्मफलदाता’ है । वे व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। उनका दिन शनिवार है और उन्हें ग्रहों में सबसे क्रूर लेकिन सबसे निष्पक्ष माना जाता है।शनि देव पिता सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। यमराज उनके भाई हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनका रंग काला है, वे नीले वस्त्र पहनते हैं, गिद्ध (या कौए) की सवारी करते हैं, और हाथों में धनुष, बाण, त्रिशूल और गदा धारण करते हैं। वेदों में शनि देव को ‘शनैश्चर’ (धीरे-धीरे चलना ) भी कहा गया है। उनके प्रमुख नाम में कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्र, यम, सौरि, मंद, शनैश्चर और पिप्पलाद शामिल है । इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से शनि दोष दूर होते हैं । शनि के प्रकोप से बचने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना महत्व पूर्ण है । काले वस्त्र, तिल, या लोहे का दान करना शनि देव को प्रसन्न करता है। ‘शनि जन्मोत्सव’ भी हर साल ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ता है जो इस वर्ष 16 मई को है ।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के यहाँ शनिदेव का जन्म हुआ था इस दिन को ‘शनिश्चरी अमावस्या’ भी कहा जाता है。 शनिदेव को मनुष्य के कर्मों के अनुसार फल देने वाला माना जाता है。 जो लोग अच्छे कार्य करते हैं, उन पर शनि की कृपा दृष्टि बनी रहती है ।इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करने से जन्मकुंडली में मौजूद शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती
साढ़ेसाती और ढैय्या ज्योतिष में, जब शनि गोचर में किसी राशि से पहले, दूसरे या बारहवें स्थान पर होते हैं, तो उसे ‘साढ़ेसाती’ कहते हैं। इसी तरह चौथे और आठवें घर में होने को ‘ढैय्या’ कहा जाता है। इन अवधियों के दौरान व्यक्ति को जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसे कर्मों के शुद्धिकरण और जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाने का समय भी माना जाता है। शनि देव का मुख्य कार्य मनुष्य के विचारों, शब्दों और कर्मों का हिसाब रखना है। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते और राजा को रंक तथा रंक को राजा बनाने की क्षमता रखते हैं।कठोर लेकिन परोपकारी शिक्षक है उनकी साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान मिलने वाले कष्ट वास्तव में जीवन के पाठ होते हैं। इनका उद्देश्य व्यक्ति के अहंकार को नष्ट कर उसे विनम्र और अनुशासित बनाना है। शनि महाराज सभी पर अपनी कृपा बनाए रखे ।

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