October 2, 2026
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इरम के आरोपी गुलजार को न्यायालय ने सुनाई उम्र कैद की सजा

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जुर्माना न देने पर आरोपी को अतिरिक्त सजा होगी भुगतनी

नैनीताल। सरोवर नगरी में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा की अदालत ने हत्या के एक गंभीर और चर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी गुलजार (पुत्र रज्जाक, निवासी रहमत नगर, कोतवाली मुरादाबाद) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बता दे न्यायालय ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी रखा गया है। अभियुक्त द्वारा घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने के जुर्म में धारा 201 आईपीसी के तहत भी तीन वर्ष का कठोर कारावास एवं 5000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में यह भी आदेश किया है कि अभियुक्त द्वारा अर्थदंड की धनराशि जमे करने पर 15 हजार रुपए मृतका की माता को देने का आदेश दिया है । अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 2 अगस्त 2023 का है, जब मृतका की बहन ने थाना तल्लीताल नैनीताल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी गुलजार मृतका को नौकरी दिलाने के बहाने अपने साथ नैनीताल लाया था। इसी दौरान आरोपी ने सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम दिया और उसकी हत्या कर दी। और आरोपी घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की और विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर 19 अगस्त 2023 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूत जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए, जिससे अभियोजन का पक्ष मजबूत हुआ। और अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा और अधिवक्ता राम सिंह रौतेला द्वारा प्रस्तुत गवाहों, दस्तावेजों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्रस्तुत किया और अदालत ने गंभीरता से लिया। अदालत ने पाया कि आरोपी द्वारा मृतका को बहाने से नैनीताल लाकर हत्या करना एक सुनियोजित और गंभीर अपराध है। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त अन्य धाराओं के अंतर्गत भी सजा और अर्थदंड निर्धारित किया गया है।

अदालत ने मृतका की माता को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया है। साथ ही, उत्तराखंड पीड़ित प्रतिकर योजना-2013 के तहत भी अतिरिक्त सहायता देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया गया है। सजा के पश्चात आरोपी को गिरफ्तार कर सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया।

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