October 2, 2026
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नैनीताल लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ भव्य समापन

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नैनीताल। सेलिंग विथ स्टोरीज थीम के साथ आयोजित नैनीताल लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे और अंतिम दिन विविध विषयों पर केंद्रित सत्रों, पुस्तक विमोचन और साहित्यिक चर्चाओं के साथ समृद्ध बौद्धिक माहौल देखने को मिला। दिनभर चले सत्रों में साहित्य, इतिहास, सिनेमा व समाज और भाषा से जुड़े अनेक पहलुओं पर विचार विमर्श हुआ, जिसमें देश के प्रतिष्ठित लेखक व चिंतक और कलाकार शामिल हुए।
पहले सत्र में ग्रचरण दास, सुभाषिनी अली, भूपेंद्र चौबे, जॉन जुब्रिस्की और पुष्पेश पंत ने भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि इतिहास को केवल तथ्यों के रूप में नहीं, बल्कि आलोचनात्मक दृष्टि से समझने की आवश्यकता है।दूसरे सत्र में लेखक अमिताभ बागची ने समीर संधीर के साथ संवाद किया। इस दौरान अमिताभ बागची ने शहरों, स्मृतियों और मानवीय अनुभवों के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। तीसरे सत्र मे गुरचरण दास ने अलका पांडे के साथ संवाद करते हुए भारतीय दर्शन में वर्णित चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ काम और मोक्ष के संदर्भ में जीवन के उद्देश्य और संतुलन पर विचार रखे। चौथे में फि ल्म निर्देशक विभु पुरी ने देविका अरोरा के साथ बातचीत में कहानी कहने की कला, पटकथा लेखन और सिनेमा की रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में चर्चा की।
दोपहर बाद आयोजित सत्र लौहूँ उसी गुलाब तक में अमिताभ सिंह बघेल ने अशोक पांडे के साथ बातचीत में बीसवीं सदी के महान फि़लिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की कविताओं के हिंदी अनुवाद और उनकी काव्य.दृष्टि पर चर्चा की।इसके पश्चात  सबा ने दीपक बलानी के साथ संवाद करते हुए उर्दू भाषा की खूबसूरती और उसके रचनात्मक प्रयोगों पर बात की। इस सत्र में भाषाए कविता और सोशल मीडिया के माध्यम से उर्दू की नई अभिव्यक्तियों पर रोचक चर्चा हुई।दिन के अंत में फेस्टिवल की टीम दवारा औपचारिक वोट ऑफ थैेकस प्रस्तुत किया गया।

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