October 2, 2026
ww yyyy ppp new lll mkl

​’बुरांश महोत्सव ‘ का हुआ शानदार आयोजन:

0
1003263180
222 aaaa bbb cccc dddd eeee ffff gggg hhhh iii jjjj kkkk lll mmm nnnn ooo pppp qqq zzzzz

5 किमी. लंबी नेचर वॉक में

छात्र-छात्राओं का वन विभाग द्वारा विशेष रूप से तकनीकी मार्गदर्शन किया

​नैनीताल। सरोवर नगरी में राज्य वृक्ष बुरांश रोडोडेंड्रन (Rhododendron) के संरक्षण और हिमालयी जैव-विविधता के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से, सोमवार को वन अनुसंधान रेंज गाजा (ज्योलीकोट), उत्तराखंड वन विभाग द्वारा ‘बुरांश महोत्सव 2026’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। ​कार्यक्रम की शुरुआत में कुमाऊं विश्वविद्यालय के वानिकी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आशीष तिवारी ने वन विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने वन विभाग की इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताते हुए कहा कि यह छात्र-छात्राओं के लिए हिमालयी जैव-विविधता को करीब से समझने और ‘बुरांश’ संरक्षण के महत्व को जानने का एक बेहतरीन और उचित अवसर है।
​इस महत्वपूर्ण आयोजन में वानिकी विभाग के लगभग 50 छात्र-छात्राओं तथा 10 प्राध्यापकों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। डी.एस.बी. परिसर से प्रारंभ होकर नैनीताल के प्रसिद्ध टिफिन टॉप (डोरथी सीट) तक गई लगभग 5 किलोमीटर लंबी इस ‘नेचर वॉक’ में वानिकी विभाग की ओर से डॉ. नंदन सिंह मेहरा तथा डॉ. मैत्री नारायण ने छात्र-छात्राओं का कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन किया।
​वहीं, इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में उत्तराखंड वन विभाग की टीम की अहम भूमिका रही। वन विभाग की ओर से वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप जोशी, वन दरोगा गीता गोस्वामी, पूरन आर्य, वन आरक्षी अर्जुन कुमार, वन आरक्षी कमला जोशी तथा वन श्रमिक नीरज जोशी ने इस नेचर ट्रेल का उत्कृष्ट संचालन किया।
​पूरी ‘नेचर ट्रेल’ के दौरान वन विभाग की ओर से अनुसंधान सहायक योगेश त्रिपाठी ने छात्र-छात्राओं का विशेष रूप से तकनीकी मार्गदर्शन किया। उन्होंने फील्ड पर पादप पहचान (प्लांट आइडेंटिफिकेशन ) का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए विभिन्न वनस्पतियों के पारिस्थितिक महत्व और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारियां साझा कीं। छात्रों को मुख्य रूप से राज्य वृक्ष ‘बुरांश’ के संवर्धन और संरक्षण की वैज्ञानिक विधियों से अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्त, छात्रों को बर्ड वाचिंग (बर्ड वाचिंग ) कराई गई और पक्षियों का वनस्पतियों के साथ सह-संबंध (Bird-Plant Association) पर भी विस्तृत चर्चा की गई। 5 किलोमीटर के इस पूरे ट्रैकिंग मार्ग में मुख्य रूप से बांज, बुरांश और पदम (हिमालयन चेरी ) के वृक्षों की बहुलता रही। इस दौरान इन प्रमुख वृक्षों के साथ-साथ मार्ग में मिलने वाली अन्य महत्वपूर्ण वनस्पतियों तथा औषधीय पादप प्रजातियों जैसे किल्मोड़ा (Berberis), विभिन्न प्रकार के फर्न, बांस और चीड़ प्रजातियों की भी विस्तार से पहचान कराई गई।
​कार्यक्रम का समापन टिफिन टॉप पर एक सार्थक परिचर्चा के साथ हुआ, जहां सभी प्रतिभागियों ने बुरांश और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सहेजने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में उत्साहवर्धन हेतु सभी छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों को वन विभाग की ओर से प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र सर्टिफिकेट ऑफ़ पार्टिसिपेशन ) वितरित किए गए। वन विभाग की इस व्यावहारिक पहल की प्राध्यापकों और छात्रों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *