October 2, 2026
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पति के निधन के बाद पुष्पा देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

जनपद नैनीताल के रामनगर क्षेत्र की निवासी पुष्पा देवी की कहानी साहस, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उनके पति के असमय निधन के बाद पूरा परिवार जैसे कठिन परिस्थितियों के बीच खड़ा हो गया। परिवार की जिम्मेदारी और भविष्य की चिंता उनके सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थी। लेकिन पुष्पा देवी ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय हिम्मत और मेहनत का रास्ता चुना। इसी दौरान उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने रीप प्रोजेक्ट से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया।
इस परियोजना के अंतर्गत उन्हें 30,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को नई ताकत दी और उन्होंने अपने घर से ही “मेघा बुटीक सेंटर” के नाम से सिलाई और बुटीक का काम शुरू किया।
शुरुआत में चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन मेहनत, धैर्य और लगन के साथ उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उनके काम की पहचान बनने लगी और आज वह इस कार्य से प्रतिवर्ष लगभग 60 से 70 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
आज पुष्पा देवी न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि अपने साहस और मेहनत से यह भी साबित कर दिया है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। वह आज अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
राज्य में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाई जा रही योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सरकारी योजनाओं और रीप परियोजना के सहयोग से कई महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।
पुष्पा देवी कहती हैं कि यदि सरकार की यह योजना और सहयोग उन्हें न मिला होता, तो शायद वह अपने जीवन की इस कठिन परिस्थिति से उबरना इतना आसान नहीं होता। आज वह मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और REAP परियोजना के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हैं।
International Women’s Day (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) के अवसर पर पुष्पा देवी की यह कहानी यह संदेश देती है कि हौसला और अवसर मिल जाए तो हर महिला अपने जीवन की दिशा बदल सकती है और समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है।

पुष्पा देवी की यह कहानी केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नए जीवन की शुरुआत की कहानी है।

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