September 26, 2026
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नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर बोला तीखा हमला

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गैरसैंण में विधानसभा सत्र को औपचारिकता बनाने की तैयारी-यशपाल आर्य

नैनीताल। नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार की मंशा गैरसैंण में प्रस्तावित पाँच दिन के विधानसभा सत्र को भी पूरी तरह संचालित करने की नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिव द्वारा जारी बजट सत्र के अनन्तिम कार्यक्रम स्पष्ट संकेत देते हैं कि सरकार सत्र को महज औपचारिकता बनाकर सीमित समय में निपटाने की तैयारी कर रही है।
श्री आर्य ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब सरकार विधायी परम्पराओं को दरकिनार करते हुए माननीय राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही वित्त विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है। उन्होंने इसे संसदीय परम्पराओं का अपमान तथा सदन की कार्यसंचालन नियमावली की भावना के विपरीत कदम बताया।
उन्होंने कहा कि स्थापित परम्परा के अनुसार वर्ष का पहला सत्र माननीय राज्यपाल के अभिभाषण से प्रारम्भ होता है और उस पर कम से कम चार दिन चर्चा होती है, जिसके बाद वित्त विधेयक पेश किया जाता है। इसी प्रकार सामान्य बजट पर भी पर्याप्त अवधि तक चर्चा और विभागवार अनुदान मांगों पर बहस का प्रावधान रहता है।
अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए श्री आर्य ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और उनकी जानकारी में उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड दोनों राज्यों में माननीय राज्यपाल के अभिभाषण के दिन वित्त विधेयक पेश करने की कोई मिसाल नहीं है। उनके अनुसार यह सरकार की लोकतांत्रिक जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन के संचालन में नियमों के साथ-साथ परम्पराओं का भी समान महत्व होता है और इन्हें केवल असाधारण परिस्थितियों में ही बदला जाता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसा कौन-सा संकट है जिसके कारण दशकों से चली आ रही परम्परा तोड़ी जा रही है।
उन्होंने आशंका जताई कि सरकार पहले ही दिन बजट पेश कर बहुमत के बल पर जल्दबाजी में पारित कराकर सत्र को समय से पहले समाप्त कर सकती है, ताकि जनता के मुद्दों और विपक्ष के प्रश्नों से बचा जा सके।
श्री आर्य ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सत्र कम से कम तीन सप्ताह चलाने की मांग की थी, जिससे कम से कम तीन सोमवार आएं और विधायक मुख्यमंत्री से संबंधित लगभग 40 विभागों के कामकाज पर प्रश्न पूछ सकें। उनका आरोप है कि सरकार इस मांग को नजरअंदाज कर सत्र को कुछ ही दिनों में समाप्त करने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रक्रियागत मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा का प्रश्न है। यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो विपक्ष इस मुद्दे को सदन से लेकर जनता के बीच मजबूती से उठाएगा।

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