September 25, 2026
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पारम्परिक पौराणिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों “कुमाऊ रंग महोत्सव “

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मैं कलाकारों ने सुनंदा की वंदना ओ नंदा सुनंदा तू देंडी है जाए पर दी प्रस्तुति

फूल देई छम्मा देई गीत पर नृत्य कर बांधा समा

नैनीताल। सरोवर नगरी के सी आर एस टी इंटर कॉलेज के सभागार में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से
पारम्परिक पौराणिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों “कुमाऊ रंग महोत्सव “का एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
संस्कृति को समर्पित ‘ सर्वोदय सेवा समिति संस्थान नैनीताल द्वारा उत्तराखण्ड संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से विकास तथा कला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचार प्रसार तथा पारम्परिक सांस्कृतिक संगीत नृत्य कार्यक्रम का आयोजन सी.आर.एस.टी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घघाटन मुख्य अतिथि मनोज पाण्डे जी प्रधानाचार्य सी.आर.एस.टी. इन्टर कालेज के द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। संस्था के अध्यक्ष आनन्द मेहरा ने मुख्य अतिथि का स्वागत बेज अलंकार कर प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संस्था के महासचिव द्वारा सम्मानित दर्शको व स्कूल के समस्त शिक्षक, शिक्षिकाएं समस्त स्टाफ व विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। सर्वोदय सेवा समिति ने सांस्कृतिक संस्थान द्वारा बीस दिवसीय झोड़ा चांचरी छपेली एवं उत्तराखंड की पारम्परिक लोक कलाओं लोक नृत्यों के प्रशिक्षण के पारम्परिक सांस्कृतिक संगीत नृत्य कार्यक्रमों ” कुमाऊ रंग महोत्सव” का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का उद्गम है हिमालय हमारी संस्कृति परम्परा और पहचान है तथा गंगा यमुना और कई अन्य नदियॉ उत्तराखण्ड में निकलती है। उनमें से गंगा संबसे पवित्र और प्रमुख है क्योकि वह भारत की आत्मा उसकी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और सभ्यता का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होने कहा कि कला, शिल्प, नृत्य और संगीत आज भी कई देवी देवताओं के साथ साथ मौसमी चक्रों पर केन्द्रित है। उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति यहॉ के लोगों की जीवनशैली में अभिव्यक्त होती है। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पर आधारित ” कुमाऊ रंग महोत्सव” पर कार्यक्रम संस्था द्वारा आयोजित किये गये। सर्वप्रथम नंदा सुनंदा की वंदना ओ नंदा सुनंदा तू देंडी है जाए, हरैला पूजन गीत नृत्य,
गीत भुवन कुमार कुमाऊनी,
झोड़ा छपेली नृत्य, गीत अजय कुमार गढ़वाली, फूल देई छम्मा देई गीत नृत्य, युगल नृत्य कुमाऊनी, गीत भुवन कुमार कुमाऊनी, भिटौली पर्व पर, ग्रुप नृत्य हीरा समदणी, गीत अजय कुमार द्वारा किया गया। निर्देशन- किशन लाल
सह निर्देशन- भगवती टम्टा
नृत्य निर्देशन-रिया टम्टा
संगीत निर्देशन भुवन कुमार।
गायन कलाकार- भुवन कुमार, हर्षिता, ललित मोहन
नृत्य कलाकार- दीपा,बबीता,तनु, रजनी,तारा,प्रीति,रियातान्या,शीतल,लवी अधिकारी, आशिष, हैरी,धीरज,जीवन,महिपाल,संदीप,हरीश,हिमांशु, धीरज,लक्ष्मण,
वाद्य कलाकार- हारमोनिय मे अजय कुमार,
ढोलक में गौवर कुमार,
हुड़का पर भूवन कुमार,
बॉसुरी पर प्रस्तुति कैलाश कुमार द्वारा दी गई। कार्यक्रम के समापन के दौरान संस्था के अध्यक्ष आनंद सिंह मेहरा ने कहा कि कि पूरे विश्व में भारत अपनी संस्कृति और परम्परा के लिए प्रसिद्ध है। ये विभिन्न संस्कृति और परम्परा की भूमि है। भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता का देश है। भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण तत्व अच्छे शिष्टाचार, तहजीब, सभ्य संवाद, धार्मिक संस्कार, मान्यताए और मूल्य आदि है। भारतीय लोक संस्कृति के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों की अति आवश्कयता है उन्होंने इस अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान, एक कदम स्वच्छता की ओर, विषय पर लोगों को जानकारी दी। कलाकारों एवं प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम का समापन के साथ सभी का आभार प्रकट करते हुए समापन किया गया। कार्यक्रम का संचालन उमेश कांडपाल द्वारा किया गया।

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