September 25, 2026
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“आईपीआर बेसिक्स फ़ॉर इनोवेटर्स एंड एंटरप्रेन्योर्स”

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विषय पर वेबिनार आयोजित

नैनीताल। सरोवर नगरी में भविष्य के इनोवेटर्स और उद्यमियों हेतु आईपीआर जागरूकता: प्रो. ललित तिवारी का मार्गदर्शक सत्र
इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल ने 20 नवंबर 2025 को “आईपीआर बेसिक्स फ़ॉर इनोवेटर्स एंड एंटरप्रेन्योर्स” विषय पर वेबिनार आयोजित किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. ललित तिवारी (निदेशक, विज़िटिंग प्रोफेसर, निदेशालय एवं विभागाध्यक्ष—वनस्पति विज्ञान विभाग, डीएसबी कैंपस, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल ने अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
डॉ. निधि वर्मा ने स्वागत भाषण दिया, जिसके बाद प्रो. आशिष तिवारी ने केंद्र की गतिविधियों का परिचय देते हुए मुख्य वक्ता प्रो. ललित तिवारी का परिचय कराया।
प्रो. तिवारी ने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों के लिए आईपीआर के महत्व को बड़े सरल और व्यावहारिक तरीक़े से समझाया। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क प्रतिदिन हजारों विचार उत्पन्न करता है—इनमें से जो विचार उपयोगी उत्पाद, प्रक्रियाएँ या समाधान बनते हैं, उन्हें बौद्धिक संपदा अधिकार के माध्यम से सुरक्षित करना आवश्यक है। आईपीआर नवाचार को नकल से बचाता है, ब्रांड वैल्यू बढ़ाता है और स्टार्टअप्स को बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देता है।
उन्होंने बताया बौद्धिक संपदा अधिकार सरकार द्वारा दिया गया वह वैधानिक संरक्षण है, जो इनोवेटर या उद्यमी को एक निर्धारित अवधि तक अपनी नवाचार संपत्ति के अनधिकृत उपयोग को रोकने का अधिकार देता है। इस प्रकार आईपीआर, नवाचार की सुरक्षा के साथ–साथ उद्यमिता के विकास, निवेश आकर्षण और बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने आईपीआर के प्रमुख घटकों—ट्रेडमार्क, डिज़ाइन, कॉपीराइट, पेटेंट, भौगोलिक संकेतक और ट्रेड सीक्रेट—को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाया तथा प्रत्येक के लिए उपयुक्त व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए। की। विशेष रूप से इनोवेटर्स और उद्यमियों के लिए यह जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी स्टार्टअप या नवाचार की पहचान, विशिष्टता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सीधे इन्हीं आईपीआर घटकों पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सही समय पर IPR को सुरक्षित करने से न केवल नवाचार की रक्षा होती है बल्कि फंडिंग, ब्रांड निर्माण, स्केल-अप और टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइज़ेशन के अवसर भी बढ़ जाते हैं।
डॉ. पेनी जोशी ने वेबिनार के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।सत्र का समापन अत्यंत सफल रहा, जिसमें शिक्षकों और छात्रों सहित कुल 60 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। यह सत्र इनोवेटर्स और उद्यमियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा, क्योंकि इसने न केवल उन्हें बौद्धिक संपदा के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया, बल्कि यह भी समझाया कि कैसे सही समय पर आईपीआर को सुरक्षित कर नवाचार को बाज़ार में स्थापित किया जा सकता है। वक्ता ने प्रतिभागियों को यह प्रेरणा दी कि वे अपने विचारों, डिज़ाइनों और आविष्कारों का मूल्य समझें और उन्हें संरक्षित कर एक मज़बूत उद्यमात्मक भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएँ।

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