September 29, 2026
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हिमालयन इकोज़ फेस्टिवल के दसवें संस्करण हुआ शुभारंभ

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पहले दिन वक्ताओं ने साझा किए अपने विचार

नैनीताल। सरोवर नगरी स्थित एबॉट्सफोर्ड एस्टेट मैं शनिवार को हिमालयन इकोज़ फेस्टिवल के 10वें संस्करण के पहला दिन आयोजित किया गया। दिन भर चले सत्रों में प्रकृति, भाषा, संस्कृति, समुदाय और हिमालय एवं दुनिया के बीच के सूक्ष्म संबंधों पर रोचक चर्चाएँ और कहानियाँ साझा की गईं। कुल छह सत्रों में भागीदारों ने इन विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शंख नाद के बाद फेस्टिवल की संस्थापक और निदेशक जन्हवी प्रसाद ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि यह उत्सव कैसे पिछले दशक से पहाड़ी स्वरों, कहानियों और विचारों को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहा है। छह वक्ताओं और 50 श्रोताओं से शुरू हुआ यह फेस्टिवल आज एक जीवंत मंच बन चुका है, जहाँ हिमालयी संस्कृति के संवर्धन के लिए रचनात्मक स्वर गूंजते हैं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार पहाड़ों, एक-दूसरे और उन नाजुक पारिस्थितिकियों का उत्सव है जो हमें एक साथ जोड़े रखती हैं। इस दौरान प्रसिद्ध कला इतिहासकार और विदुषी डॉ. अलका पांडे ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने इतिहास, पौराणिक कथाओं और भूगोल को एक सूत्र में पिरोते हुए श्रोताओं से पहाड़ों को संस्कृति और पर्यावरण के संयोग के रूप में देखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा- “ऐसे उत्सव हमें आदिवासी ज्ञान प्रणालियों के साथ फिर से संवेदनशील बनाते हैं, जहाँ आध्यात्मिकता और पर्यावरण अलग नहीं बल्कि एक ही सत्य के दो पहलू हैं।
उन्होंने कवि कालिदास का उल्लेख करते हुए कहा- “कालिदास ने हिमालय को एक दृश्य से ऊपर उठाकर जीवंत आत्मा के रूप में चित्रित किया एक ऐसा सत्ता संपन्न अस्तित्व जो दैवीय उपस्थिति से भरा है।
पहले सत्र में भूटान की लेकी त्शेवांग, जो रॉयल अकादमी ऑफ़ परफॉर्मिंग आर्ट्स से संवद्ध हैं, ने अपने भूटानी वाद्य यंत्र के साथ भूटानी, पहाड़ी और हिंदी गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति ने हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझा सांस्कृतिक सुरों को उजागर किया। दूसरे सत्र में पुरस्कार विजेता लेखिका अनुराधा राय ने अपनी आगामी संस्मरण पुस्तक कॉल्ड बाई दा हिल्स का प्रथम दर्शन करवाया। अदिति सिंह साह, नैनीताल स्थित दृश्य कलाकार और शिक्षिका, से वार्ता में राय ने बताया कि कैसे पहाड़ उनके लेखन का विषय भी हैं और उनका दृष्टिकोण भी निर्मित करते हैं। इस सत्र में संरक्षणवादी नेहा सिन्हा (लेखिका वाइल्ड एंड विफुल) और एनडीटीवी 24×7 की वरिष्ठ एंकर गार्गी रावत (लेखिका टाइगर सीजन) शामिल रहीं। उन्होंने भारत के वन्य जीवों की विविधता और उनके नाजुक आवासों पर चर्चा की। नेहा ने अपनी आगामी पुस्तक वाइल्ड कैपिटल (जनवरी 2026, हरपेरकॉलिंस) का भी जिक्र किया। दोनों ने संवेदनशील कहानी और वकालत के माध्यम से जनमानस में वन्यजीवों के प्रति समझ बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया। लेखिका और अनुवादक अरुंधति नाथ से निहारिका बिजली (लेखिका एवं पीवीआर इनोक्स की लीड स्ट्रैटेजिस्ट) ने वार्ता की। नाथ ने बंगाली साहित्य में विभिन्न प्रकार के भूतों, उनके ‘व्यंग्यात्मक हास्य’ और ‘बौद्धिक विनोद’ पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने क्लासिक भूत कथाओं का आधुनिक पाठकों के लिए अनुवाद किया और कैसे ये कथाएँ हमारी स्मृतियों और पुराने संबंधों से जुड़ी भावनाओं को दर्शाती हैं। जन्हवी प्रसाद की नई पुस्तक का विमोचन ‘ नैनीताल वरिष्ठ नागरिकों द्वारा किया गया। यह ग्रंथ शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यात्रा को व्यक्तिगत कथाओं और सामूहिक स्मृतियों के माध्यम से दरशाता है। प्रसाद ने इसे अपने गृहनगर के लिए श्रद्धांजलि बताया।

इस सत्र में सुजीव शाक्य, लेखक और Nepal Economic Forum के चेयर, से नवरोज़ धोंडी ने वार्ता की। उन्होंने शाक्य की नवीनतम पुस्तक Nepal 2043 – The Road to Prosperity (Penguin) पर चर्चा की और नेपाल एवं पूरा हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास की संभावनाओं पर विचार किया। समापन सत्र में राहुल भूषण (ईको-आर्किटेक्ट एवं नार्थ के संस्थापक, नगर) और शगुन सिंह (संस्थापक गीली मिट्टी फाउंडेशन) ने भाग लिया। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन, सामुदायिक भागीदारी और टिकाऊ जीवन प्रथाओं पर चर्चा की। राहुल भूषण ने अपनी पुस्तक के माध्यम से 10 सालों के अनुभव साझा किए, जबकि शगुन सिंह ने री-वाइल्डिंग और सर्कुलर लिविंग के महत्त्व पर बल दिया। इस मेले में सत्रों के साथ सजाया गया कुमाऊँ बाज़ार स्थानीय शिल्पकारों और डिज़ाइनरों की रचनात्मकता का प्रतीक था। पीली, पाला, ताराइब्लू, म्यारर, बैनी आदि ब्रांड्स के साथ पिकले सिकले और रुस्टिक स्लाइस6 कैफ़े की स्वादिष्ट पेशकशें भी रहीं। श्रोताओं ने ताज़ी कॉफी, बेकरी आइटम्स और चाइनीज़, मुग़लई तथा कॉन्टिनेंटल भोजन का आनंद लिया। इसके अपरांत
अंत में इसके अपरांत होटल आरिफ कैसल में ‘मिताहार फूड विज़डम फ्रॉम माय इंडियन किचन’ सत्र आयोजित हुआ,
जिसमें प्रमुख पोषण विशेषज्ञ रुजुता दिवेकर ने कविता खोसा (उद्यमी एवं पूरीअर्थ की संस्थापक) से संवाद किया। इसमें भारतीय खान-पान की परंपराएँ, सतर्क भोजन और स्थायी पोषण के सिद्धांतों पर विचार हुआ। इसके बाद रेहमत-ए-नुसरत द्वारा सूफी संगीत प्रस्तुति दी गई जिसने पहले दिन के कार्यक्रम का सुंदर समापन किया। रात्रिभोज भी होटल आरिफ कैसल में आयोजित हुआ। आयोजक जाह्नवी ने बताया आज पहले दिन की सफलता के साथ हिमालयन इकोज़ उत्सव कल नए जोश और नई चर्चाओं के साथ पहाड़ी जीवन के विभिन्न पहलुओं की खोज जारी रहैगा।

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