October 5, 2026
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कुमाऊं विश्वविद्यालय जल्द ही प्रारंभ करेगा अपना

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प्रथम स्टार्टअप: हर्बल एवं
कॉस्मेटिक उत्पादों का होगा निर्माण

नैनीतालl सरोवर नगरी में कुमाऊं विश्वविद्यालय नवाचार और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। विश्वविद्यालय जल्द ही अपना पहला स्टार्टअप प्रारंभ करेगा, जिसके तहत विभिन्न हर्बल एवं कॉस्मेटिक उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
कुलपति प्रो. दिवान सिंह रावत के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भीमताल स्थित फार्मेसी विभाग में इस स्टार्टअप को जल्द ही प्रारंभ किया जाएगा।
कुलपति प्रो. दिवान सिंह रावत का संदेश “कुमाऊं विश्वविद्यालय ने हमेशा शिक्षा, शोध और नवाचार को प्राथमिकता दी है। हमारा यह स्टार्टअप पहल छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग से जोड़ने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम न केवल गुणवत्ता युक्त हर्बल और कॉस्मेटिक उत्पादों का निर्माण करेंगे, बल्कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर क्षेत्रीय विकास को भी गति देंगे। मैं विश्वविद्यालय के सभी शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से आह्वान करता हूं कि वे इस पहल का हिस्सा बनें और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाएं।”
कुमाऊं विश्वविद्यालय, जोकि उत्तराखंड के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है, नवाचार और शोध को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। विश्वविद्यालय जल्द ही अपना प्रथम स्टार्टअप प्रारंभ करेगा, जिसके अंतर्गत विभिन्न हर्बल एवं कॉस्मेटिक उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य शोध को व्यावहारिक रूप देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और छात्रों को उद्योग से जोड़ना है।
स्टार्टअप का उद्देश्य एवं संभावनाएं
यह स्टार्टअप विश्वविद्यालय के भीमताल स्थित फार्मेसी विभाग में स्थापित किया जाएगा और इसके तहत विशेष रूप से प्राकृतिक एवं औषधीय गुणों से भरपूर हर्बल उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
इस पहल से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे:

  1. शोध और नवाचार को बढ़ावा – विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को अपने अनुसंधानों को व्यावसायिक रूप देने का अवसर मिलेगा।
  2. स्थानीय संसाधनों का उपयोग – उत्तराखंड के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जैसे कि जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का उपयोग कर उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
  3. रोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहन – छात्रों को न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे स्टार्टअप के माध्यम से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को भी बढ़ावा दे सकेंगे।
  4. गुणवत्तापूर्ण हर्बल एवं कॉस्मेटिक उत्पादों का निर्माण – वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रमाणित उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को प्राकृतिक और सुरक्षित उत्पाद मिल सकें।
  5. अर्थव्यवस्था में योगदान – स्थानीय स्तर पर उत्पाद निर्माण से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।
    परियोजना की स्वीकृति एवं प्रगति
    इस स्टार्टअप की नींव कुलपति प्रो. दिवान सिंह रावत द्वारा फरवरी माह में रखी गई थी, जब उन्होंने इस परियोजना के पायलट प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान की थी। इस परियोजना के अंतर्गत, विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा स्वयं के फॉर्मूला विकसित और परिष्कृत किए जा रहे हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले हर्बल और कॉस्मेटिक उत्पाद बनाए जा सकें।
    अभी तक की प्रगति के तहत:
    • आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है।
    • शोधकर्ता और वैज्ञानिक विभिन्न औषधीय पौधों पर अध्ययन कर रहे हैं।
    • प्रारंभिक उत्पादों के प्रोटोटाइप पर कार्य किया जा रहा है।
    भविष्य की योजना एवं विस्तार
    स्टार्टअप के सफल क्रियान्वयन के बाद, विश्वविद्यालय इसे एक बड़े स्तर पर विस्तारित करने की योजना बना रहा है। इस दिशा में निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
  6. उत्पादों का व्यावसायीकरण – बाजार में विश्वविद्यालय के नाम से हर्बल उत्पाद लॉन्च किए जाएंगे।
  7. उद्योगों और संस्थानों से साझेदारी – विभिन्न कंपनियों और संगठनों के साथ सहयोग स्थापित किया जाएगा।
  8. ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म – उत्पादों की बिक्री के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल आउटलेट्स का उपयोग किया जाएगा।
  9. नए अनुसंधान एवं उत्पाद विकास – भविष्य में अन्य औषधीय उत्पादों पर भी शोध कर नए इनोवेटिव उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
    कुमाऊं विश्वविद्यालय का यह स्टार्टअप शोध और नवाचार को एक नया आयाम देगा। यह परियोजना न केवल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी, बल्कि इसे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी एक सफल उद्यम बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इस पहल को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
    यह स्टार्टअप विश्वविद्यालय के नवाचार और शोध को एक नई दिशा देगा तथा छात्रों को नए अवसर उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इस पहल को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी के तहत विगत 20 मार्च से दिन दिवसीय एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया जिसमें वाह्य विशेषज्ञ के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय की संबंधित स्टार्टअप की संयोजक डॉ हेमा भंडारी द्वारा प्रशिक्षण दिया गया एवं इसमें विभिन्न उत्पादों का सफलतापूर्वक निर्माण किया गया। इस क्रम में अब विश्वविद्यालय के अपने स्टार्टअप का नाम एवं ट्रेडमार्क बनाए जाने हेतु छात्रों से ही विचार मांगे गए है एवं जिस छात्र की एंट्री को सफलता प्राप्त होगी उसे पुरस्कृत किए जाना है। उक्त प्रोजेक्ट के प्रभारी फार्मेसी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ राजेश्वर कमल कांत को बनाया गया है एवं विभाग के अन्य शिक्षक अरविंद जंतवाल इसके सह प्रभारी है।

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