राज्य के प्राथमिक गुरुजन कल से करेंगे गैर शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार
नैनीताल। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने कहा है कि १ नवंबर से शिक्षक अपने शैक्षिक दायित्वों के अतिरिक्त केवल शिक्षक छात्र उपस्थित एवं पीएम पोषण से संबंधित सूचनाओं का ही कार्य करेंगे एवं शिक्षा विभाग में जितने भी गैर शैक्षिक संस्थाएं अपना मकडजाल बुन चुकी है उन्हें किसी भी प्रकार से सहयोग नहीं किया जाएगा। संगठन का कहना है कि सरकारी नीतियों के कारण राज्य की प्रारंभिक शिक्षा दिन प्रतिदिन अपनी पहचान खोती जा रही है जिसके लिए अब संगठन ने बीड़ा उठाया है।
संगठन के प्रांतीय पदाधिकारी मनोज तिवारी एवं दिगंबर सिंह नेगी के संयुक्त हस्ताक्षरों से जारी कार्यालय ज्ञाप में प्रारंभिक शिक्षा की बदहाली पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी गैर शैक्षिक कार्यों को नहीं करने का निर्देश राज्य के सभी जनपदों एवं बलॉक इकाइयों को भेजा गया है जिसकी सूचना सभी संबंधित स्तरों पर लिखित रूप में भेजी जा चुकी है। उनका कहना है कि गलत सरकारी नीतियों के कारण राजकीय विद्यालय में प्रतिवर्ष छात्र नामांकन में अत्यधिक कमी होने तथा नवीन नामांकन नहीं होने, विद्यालयों में भौतिक एवं मानवीय संसाधनों की पर्याप्त मुहैया नहीं होने, शिक्षकों की पदोन्नतियां नहीं होने से वर्तमान में शिक्षकों के सैकड़ो पद खाली पड़े हैं।
शिक्षकों को वर्ष भर गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझा कर विद्यालय से बाहर किया जा रहा है इसके पश्चात भी शिक्षक विषम स्थितियों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं परंतु अब वर्तमान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था में गैर शैक्षिक संस्थाओ की घुसपैठ और उनके द्वारा चलाए जा रहे अंतहीन ऑनलाइन मोबाइल एप्स के कारण शिक्षक अपने मूल कार्यों को नहीं कर पा रहे हैं यही नहीं नेटवर्क या अन्य तकनीकी समस्या के कारण यदि समय पर यह कार्य नहीं हो पाए तो शिक्षकों का वेतन रोकने एवं उनके खिलाफ अन्य विभागीय कार्रवाई किए जाने से शिक्षक अत्यंत मानसिक दबाव की स्थितियों में है जिसका परोक्ष एवं अपरोक्ष दुष्प्रभाव सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।संगठन ने सभी शिक्षकों से आवाहन किया है कि वह अपने शैक्षिक दायित्वो के प्रति पूर्णतया समर्पित भाव से कार्य कर सरकारी शिक्षा के अस्तित्व को बचाने के लिए पूर्ण मन योग से कार्य करेंगे।

























