भवाली शहर मे भवन निर्माण और शहर की सड़कों के समाधानों को लेकर राज्य मंत्री भावना को सोपा ज्ञापन

नैनीताल सरोवर नगरी में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण मे आवाज सलाहकार परिषद की उपाध्यक्ष राज्य मंत्री भावना मेहरा की बैठक में नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा के जिला कार्यकारिणी सदस्य संजय वर्मा ने राज्य मंत्री भावना को प्रदेश के पुराने नगरों एवं वर्षों पूर्व विकसित आबादी क्षेत्रों में अंतर्नगरीय सड़कों के समीप भवन निर्माण संबंधी नियों में सरलीकरण एवं व्यावहारिक छूट प्रदान किए जाने के संबंध में ज्ञापन सोपा है साथ ही निवेदन करते हुए समाधान के लिए कहा गया और बताया कि उत्तराखंड प्रदेश के विभिन्न नगरों एवं कस्बों में अंतर्नगरीय सड़कों के समीप निजी भूमि पर भवन निर्माण एवं पुननिर्माण करवाने वाले अ-स्वामियों को वर्तमान में लागू भवन निर्माण संबंधी नियमों के कारण अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड के अनेक नगर दशकों पूर्व विकसित हो चुके हैं। इन नगरी की सड़के भी वर्षों पूर्व निर्मित हुई थीं तथा इनके दोनों ओर लंबे समय से घनी आबादी बसी हुई है। समय के साथ इन सड़कों के किनारे आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों का निर्माण हो चुका है। वर्तमान परिस्थितियों में इन पुरानी सड़कों का चौडीकरण व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, क्योंकि इनके दोनों ओर पहले से ही स्थायी भवन एवं पुरानी आबादी मौजूद है।
उदाहरण के तौर पर भवाली नगर पालिका, जो वर्ष 1916 से अस्तित्व में है, एक पुराना एवं ऐतिहासिक नगर है। यहां की सड़कें एवं आबादी लंबे समय से विकसित हैं। नगर की अधिकांश सड़कों के दोनों और वर्षों से आवासीय एवं व्यावसायिक भवन बने हुए हैं। ऐसी परिस्थितियों में इन सड़कों का चौड़ीकरण करना लगभग असंभव है। इसके बावजूद सड़क की मध्य रेखा से निर्धारित दूरी एवं अन्य निर्माण संबंधी प्रतिबंधों के कारण आसपास की निजी भूमि पर भवन निर्माण एवं पुनर्निर्माण में नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने नगर की सड़क दशकों पूर्व निर्मित हो चुकी हो, उसके दोनों ओर स्थायी आबादी विकसित हो गई हो तथा भविष्य में भी उसका चौड़ीकरण संभव न हो, तो ऐसी सड़क के लिए नई प्रस्तावित सड़कों अथवा भविष्य में विकसित होने वाले मार्गों के समान निर्माण प्रतिबंध लागू करना आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि की सीमित उपलब्धता तथा पुराने नगरों की पारंपरिक बसावट मैदानी क्षेत्रों से काफी भिन्न है। ऐसे में सभी क्षेत्रों के लिए एक समान निर्माण मानक लागू करने के स्थान पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नियमों में व्यावहारिक बदलाव किया जाना आवश्यक है। उन्होंने राज्य मंत्री से निवेदन करते हुए जनहित में निम्नलिखित बिंदुओं पर सकारात्मक निर्णय लेने का निवेदन किया है जिसमें
- प्रदेश के पुराने एवं वर्षों से विकसित नगरों तथा आबादी क्षेत्रों को सामान्य सड़क चौड़ीकरण एवं प्रस्तावित नई सड़कों के लिए निर्धारित निर्माण प्रतिबंधों से अलग श्रेणी में रखा जाए। 2. ऐसी पुरानी अंतर्नगरीय सड़कों, जिनका चौड़ीकरण वर्तमान परिस्थितियों में संभव नहीं है, के समीप भवन निर्माण के लिए सड़क की मध्य रेखा से निर्धारित दूरी के नियमों में आवश्यक सरलीकरण एवं व्यावहारिक छूट प्रदान की जाए। 3. भवाली जैसे ऐतिहासिक एवं पुराने नगरों के लिए उनकी वास्तविक भौगोलिक एवं बसावट संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पृथक भवन निर्माण मानक अथवा विशेष भवन उपविधियां निर्धारित की जाएं। पूर्व पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा ने सभी समस्याओं के समाधान के लिए निवेदन किया है। उन्होंने कहा उनके इस संशोधन से प्रदेश के हजारों नागरिकों को राहत मिलेगी।

























