बौद्धिक संपदा अधिकार शोधार्थी के लिए महत्व पूर्ण और शोधार्थी की आर्थिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण: प्रो ललित तिवारी



नैनीताल। सरोवर नगरी में शोध पद्धति कार्यशाला के तृतीय दिवस् के प्रोफेसर ललित तिवारी ने बौद्धिक संपदा अधिकार शोधार्थी के लिए महत्व पूर्ण है तथा शोधार्थी की आर्थिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण है कहा । शोधार्थी को बौद्धिक संपदा अधिकार की जानकारी उनके शोध को बेहतर करने में भी मददगार है। कुमाऊं विश्वविधालय के विजिटिंग प्रोफेसर के निदेशक तथा वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रॉफ ललित तिवारी ने समाजशास्त्र विभाग की तथा आई सी एस एस आर द्वारा प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला के तृतीय दिवस् के अवसर पर कही।
प्रॉफ तिवारी ने कहा बौद्धिक संपदा आविष्कार के निर्माण में महत्व पूर्ण है ।उन्होंने कहा कि संसार में ऐसी कोई समस्या नहीं है जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्तिशाली हो ।मनुष्य का दिमाग कमाल का होता है जिसमें 10, बिलियन न्यूरॉन्स तथा 60 से 70 हजार विचार प्रोटीन आते है जो किसी भी समस्या को समाप्त करने तथा रचनात्मकता को बढ़ावा देते है ताकि देश में शोध एवं विकास की दर को बढ़ाया जा सके । उन्होंने कहा कि के समय बद्ध तथा टेरिटोरियल अधिकार है जिसमें कॉपी राइट ,,ट्रेड मार्क ,पेटेंट ,इंडस्ट्रियल डिजाइन ,ज्योग्राफिकल इंडिकेशन , ले आउट डिजाइन ,ट्रेड सीक्रेट ,प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज आते है । उन्होंने उत्तराखंड के 4 दिसंबर 2024 को एक साथ मिले जी आई टैग जिसमें लाल चावल , दन ,आदि भी है पर भी प्रकाश डाला ।
ये सभी नियम ट्रीप्स के बाद 1 जनवरी 1995 से लागू किया गया है ताकि नागरिक बेहतर रचनात्मक कार्य कर देश के आर्थिकी में योग दान कर सके तथा शोध में एंटरप्रेनर शिप को बढ़ावा मिल सके ।

























