October 24, 2026
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ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥

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नैनीताल सरोवर नगरी में शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूप के पूजा की जाती है तथा इसमें श्री रामलीला का जुड़ना इस कार्य को और महत्वपूर्ण करता है । माँ दुर्गा
शक्ति, संरक्षण और मातृ प्रेम के साथ त्रिशूल, चक्र, गदा, धनुष, तलवार और कमल सहित कई दिव्य अस्त्र धारण करती है । जब महिषासुर जैसे राक्षसों का अत्याचार बड़ा, तब सभी देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, शिव की सामूहिक ऊर्जा और शक्ति से मां दुर्गा प्रकट हुईं तथा उन्होंने महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, धूम्रलोचन और दुर्गमासुर जैसे राक्षसों का वध कर सभी की रक्षा की । माँ दुर्गा में संपूर्ण ब्रह्मांड की आदिशक्ति और सर्वोच्च ऊर्जा समाई हुई है । ‘दुर्गा’ शब्द ‘दुर्ग’ से बना है, जिसका अर्थ है एक ऐसा किला या स्थान जिसे जीतना कठिन हो। अपने भक्तों की रक्षा करने वाली और संकटों का नाश करने वाली देवी हैं। माँ दुर्गा सृजन, पालन और अधर्म के संहार की संयुक्त शक्ति हैं ।
माँ दुर्गा की आठ भुजाएँ आठ प्रकार के बलों के प्रतीक है जिसमें शरीर बल, विद्या बल, चातुर्य बल, धन बल, शस्त्र बल, शौर्य बल, मनोबल और धर्म बल शामिल है ।
मां त्रिनेत्री त्र्यंबिका है जिसकी बाईं आँख इच्छा का, दाहिनी आँख कर्म का और तीसरी आँख ज्ञान को दर्शाती है ।
मां दुर्गा का वाहन सिंह (शेर) शक्ति की प्रचंडता और दृढ़ संकल्प का परिचायक है।
नवदुर्गा को नवरात्रि में नौ रूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के रूप में पूजित होती है, जो जीवन में संयम, साहस, ऊर्जा और सिद्धि का संदेश देते हैं।
मां को अम्बे, जगदम्बा, शेरांवाली, और महिषासुर मर्दिनी ,भगवती के न से भी पुकारा जाता तथा दुर्गा देवी पार्वती का ही स्वरूप ही है।
दुर्गा सप्तशती तथा मार्कण्डेय पुराण मां दुर्गा को समर्पित है । मां के नौ रूप में प्रथम शैलपुत्री जिसका रंग सफेद
ओर पर्वतराज हिमालय की पुत्री है ।द्वितीय ब्रह्मचारिणी
जिसका रंग: लाल और तपस्या और ज्ञान का स्वरूप। तृतीय चन्द्रघंटा जिसका रंग: शाही नीला / नीला और
मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने वाली है। चौथी कूष्माण्डा जिनका रंग पीला है और अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड की रचना करने वाली है ।
पांचवीं स्कंदमाता
जिसका रंग हरा है और
भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता है । छठी
कात्यायनी जिसका रंग स्लेटी (ग्रे) है और महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुईं ।सातवीं कालरात्रि जिनका रंग नारंगी और माता दुर्गा का अत्यंत उग्र और शुभकारी (शुभंकरी) स्वरूप है ।आठवीं महागौरी है जिनका रंग मोरपंखी हरा ओर अत्यंत गौर वर्ण और शांत स्वरूप वाली है । नवम
सिद्धिदात्री है जिनका
रंग गुलाबी जो सभी प्रकार की सिद्धियाँ और निधियाँ देने वाली है ।ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
जय मां दुर्गा प्राणीमात्र का कल्याण करे यही प्रार्थना है।

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