August 5, 2026
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बांकीपुर उपचुनाव से सबक जरुरी

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नैनीताल विधानसभा सीट में भी समर्थकों और ग्रामीणों की नाराजगी कहीं

भाजपा को पड़ जाये ना भारी: राजनैतिक विश्लेषक और‌ युवा कार्यकर्ता गौरव‌ गोस्वामी

नैनीताल। हाल ही में देश के तीन प्रमुख राज्यों में हुए उपचुनावों में बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट सबसे अधिक चर्चा में रही। यह सीट भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। इस कारण चर्चा के केन्द्र में रही। बांकीपुर में भाजपा की हार को केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि संगठन और स्थानीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा सकता है। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और समर्पित कार्यकर्ताओं का मजबूत संगठन है। पार्टी को लगातार मिली चुनावी सफलताओं में कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं, समर्थकों और मतदाताओं की भावनाओं की अनदेखी होती है तो उसका असर चुनावी परिणामों पर भी दिखाई दे सकता है। बता दे राजनैतिक विश्लेषक और‌ युवा कार्यकर्ता गौरव‌ गोस्वामी का क्या मानना है जाने उत्तराखंड की नैनीताल विधानसभा सीट को लेकर भी स्थानीय स्तर पर असंतोष की चर्चा तेज हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनावों में भाजपा को बड़ी बढ़त दिलाने में ग्रामीण मतदाताओं की अहम भूमिका रहती है, लेकिन चुनाव के बाद इन्हीं क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता और जा रहा है । ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मूलभूत सुविधाओं की समस्या जैसे सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य को लेकर आज भी ग्रामीण संघर्ष कर रहे हैं, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की शिक्षा, मरीजों के इलाज और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। आपातकालीन परिस्थितियों में कई स्थानों पर मरीजों को आज भी डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाने की नौबत आती है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के संबंध में केवल घोषणाएं होती हैं, लेकिन उनका अपेक्षित प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता।स्थानीय स्तर पर बढ़ती नाराजगी का असर अब राजनीतिक माहौल में भी दिखाई देने लगा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में “रोड नहीं तो वोट नहीं” जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं और कुछ स्थानों पर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी सामने आ रही है और इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों के मुद्दों की उपेक्षा करते रहे तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ना निश्चित है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के बीच मौजूदा विधायक को लेकर नाराजगी भी बहुत ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों के जनहित विषयों पर ढुलमुल रवैया,बैठकों की खानापूर्ति से जनता में और नाराजगी है। जनता के विषयों से सरोकार नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए कोई प्लान नहीं और कब तक ग्रामीण क्षेत्रों के मूलभूत विषयों को ध्यान में रखकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जायेगा इस पर कोई स्पष्ट विचार नहीं और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान ना करने पर आगामी चुनाव में जनता की नाराजगी का असर दिखना तय है ऐसे में पार्टी के लिए बिना बदलाव चुनाव में उतरना जोखिम भरा हो सकता है‌। जनता की समस्याओं पर जो कारण बताए जाते हैं वो संतुष्ट करने वाले नहीं हैं। ऐसे में पार्टी के लिए चेहरे में बदलाव किये बिना सफलता की राह मुश्किल हो सकती है । मजबूत लीडरशिप के अलावा स्थानीय स्तर पर जनता के विषयों में जमीनीस्तर पर कार्य करने वाले नेतृत्व की पार्टी को जरुरत है जो स्थानीय विषयों की जानकारी रखता हो और जनता में जिसके लिए विश्वसनीयता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में जनता विकास चाहती है और विकास कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए आपने क्या किया और आप क्या कर रहे हैं और आप कैसे समाधान करेंगे वो जनता जानना चाहती है। पार्टी संगठन के लिए कार्यकर्ताओं, समर्थकों और मतदाताओं की शिकायतों को सुनना तथा स्थानीय समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही विकास कार्यों की नियमित समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन से ही जनता का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।

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