October 7, 2026
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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिरों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच

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उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा सर्वदलीय विधानसभा समिति से कराई जाए- नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य

नैनीताल। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि केदारनाथ मंदिर के स्वर्ण प्रकरण और अयोध्या के राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं की चर्चाओं के बाद अब श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से संबंधित कथित गड़बड़ी की खबरों ने करोड़ों सनातनियों की आस्था को गहरी चिंता में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सभी मामलों पर गंभीरता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
श्री यशपाल आर्य ने कहा कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में पिछले लगभग दस वर्षों से अध्यक्ष सहित अधिकांश सदस्य भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। इस अवधि में मंदिर समिति के कार्यों को लेकर समय-समय पर विभिन्न प्रकार के आरोप और अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन सरकार ने किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ स्वर्ण प्रकरण में भी आज तक सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जांच किस एजेंसी ने की, उसकी रिपोर्ट क्या है और उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उनका कहना था कि उपलब्ध अभिलेखों और उठे प्रश्नों ने पूरे प्रकरण को संदेहास्पद बना दिया है तथा सरकार जवाबदेही से बचती हुई दिखाई देती है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि हाल ही में सार्वजनिक हुए कुछ अभिलेखों से यह संकेत मिलता है कि मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों तथा कर्मचारियों द्वारा मंदिर निधि के उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान से प्राप्त धन का उपयोग प्रधानमंत्री के भाई, एक मंत्री की पुत्री तथा स्थानीय विधायक की यात्रा पर किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों के बाद मंदिर समिति के अध्यक्ष ने 20 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की घोषणा की थी, किंतु एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। इससे जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
श्री यशपाल आर्य ने कहा कि अब श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए हैं और मंदिर समिति के अध्यक्ष पुनः आंतरिक जांच समिति से जांच कराने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आरोप स्वयं अध्यक्ष के निजी स्टाफ से जुड़े व्यक्तियों पर लगाए जा रहे हों, तब उसी व्यवस्था द्वारा गठित जांच समिति से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री केदारनाथ मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के सर्वोच्च केंद्र हैं। ऐसे में इन मंदिरों से जुड़े किसी भी प्रकार के वित्तीय अनियमितता के आरोप केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि इन सभी मामलों की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र जांच समिति से कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हो तो उत्तराखंड विधानसभा की सर्वदलीय जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह बहाल हो सके।

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