September 24, 2026
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प्रवेश प्रक्रिया में लापरवाही पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय सख्त-५९ महाविद्यालयों को कारण बताओ नोटिस

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नैनीताल । कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (कर्नल) दीवान सिंह रावत ने प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में महाविद्यालयों की उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए ५९ संबद्ध महाविद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
विश्वविद्यालय में  आयोजित प्रवेश समिति की बैठक में स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रवेश, समर्थ पोर्टल पर पंजीकरणए विषयवार प्रवेश व्यवस्था, सीट निर्धारण, छात्र मार्गदर्शन तथा प्रवेश प्रक्रिया के प्रभावी संचालन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में ५९ महाविद्यालयों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे जबकि ४३ महाविद्यालयों द्वारा प्रवेश प्रक्रिया हेतु नोडल अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी सूचना अब तक विश्वविद्यालय को मुहैया नहीं कराई गई है।
कुलपति प्रो. रावत ने इस स्थिति पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया की सुचारु निगरानी एवं समन्वय के लिए प्रत्येक महाविद्यालय में नोडल अधिकारी की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में सभी संबद्ध महाविद्यालयों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने एवं उनकी सूचना विश्वविद्यालय को उपलबध कराने हेतु निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अनेक महाविद्यालयों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई जिससे प्रवेश प्रक्रिया के प्रभावी संचालन में बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।
कुलपति प्रो रावत ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के मध्य समन्वय विद्यार्थियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी प्रवेश सुविधा मुहैया कराने के लिए अनिवार्य है। बैठक में अनुपस्थित रहना तथा विश्वविद्यालय के निर्देशों की अनदेखी करना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिचायक है।उन्होंने संबंधित महाविद्यालयों से तत्काल स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं तथा चेतावनी दी है कि छात्र हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उदासीनता एवं निर्देशों की अवहेलना भविष्य में भी पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।कुलपति ने सभी महाविद्यालयों से प्रवेश प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा विश्वविद्यालय के साथ सतत समन्वय बनाए रखने का आह्वान किया ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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