September 24, 2026
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जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल का निजी स्कूलों पर कड़ा रुख

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12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस हुए जारी

अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने पर जिला प्रशासन का सख्त रुख

अब तक नैनीताल जनपद के कुल 50 प्राइवेट स्कूलों को भेजे जा चुके हैं नोटिस

हल्द्वानी नैनीताल। जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देशों के क्रम में मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल गोविंद राम जायसवाल द्वारा जनपद के विभिन्न निजी विद्यालयों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों एवं जांच आख्या के आधार पर कार्यवाही करते हुए 12 निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस प्राप्त करने वाले विद्यालयों में वेदान्तंम इंटरनेशनल स्कूल जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा हल्द्वानी, चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल बरेली रोड हल्द्वानी, न्यू बाल संसार स्कूल तीनपानी हल्द्वानी, आरुष पब्लिक स्कूल हाथीखाल हल्द्वानी, जी किड्स पब्लिक स्कूल सुरभि कॉलोनी मल्ली बमौरी हल्द्वानी, काठगोदाम पब्लिक जूनियर हाईस्कूल सुरभि कॉलोनी मल्ली बमौरी हल्द्वानी, लिटिल स्पार्कल एकेडमी मोटाहल्दू, मानस पब्लिक स्कूल, निलियम कॉलोनी मानपुर वेस्ट हल्द्वानी, नेशनल पब्लिक स्कूल कुसुमखेड़ा हल्द्वानी, श्री कृपा पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, सेंट जॉर्ज स्कूल, आरटीओ रोड हल्द्वानी, समिट पब्लिक स्कूल, सीएमटी कॉलोनी डहरिया हल्द्वानी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली एवं भीमताल क्षेत्र के 38 विद्यालयों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब तक नोटिस प्राप्त करने वाले स्कूलों की संख्या 50 हो गई है।

प्रमुख आरोप एवं अनियमितताएं
जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आए हैं कि कई निजी विद्यालयों द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पुस्तकों के अतिरिक्त अत्यधिक महंगी निजी प्रकाशनों की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त कुछ विद्यालयों द्वारा विशिष्ट विक्रेताओं से पुस्तकें एवं अन्य शिक्षण सामग्री क्रय करने हेतु अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है तथा विद्यालयों की वेबसाइट पर अनिवार्य सूचनाओं का प्रकटीकरण भी नहीं किया गया है।

विधिक आधार एवं निर्देश
यह कार्यवाही ‘बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’, ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। शासन का उद्देश्य शिक्षा को सुलभ, पारदर्शी एवं आर्थिक रूप से न्यायसंगत बनाना है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा संबंधित विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि
15 दिवस के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी कर एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए।
किसी भी प्रकार की विक्रेता विशेष की बाध्यता तत्काल समाप्त की जाए। विद्यालय अपनी वेबसाइट पर पुस्तक सूची एवं शुल्क संरचना का पूर्ण प्रकटीकरण सुनिश्चित करें। अभिभावकों द्वारा पूर्व में खरीदी गई अनावश्यक पुस्तकों के संबंध में धनवापसी/समायोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त वसूले गए विभिन्न अवांछित शुल्कों का समायोजन आगामी महीनों की फीस में किया जाए।
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार संबंधित विद्यालय की जांच हेतु विकासखंड स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित की गई है, जो 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या प्रस्तुत करेगी।
निर्धारित समयसीमा में आदेशों का अनुपालन न करने की स्थिति में संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध मान्यता निलंबन/निरस्तीकरण सहित विधिक एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
जारी नोटिस में कहा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है एवं किसी भी प्रकार की अवहेलना को गंभीर उल्लंघन मानते हुए कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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