September 24, 2026
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बिना किसी दिखावे के चुपचाप अपनी भक्ति में लीन रहने का नाम है भक्ति: प्रताप नगरकोटी

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भगवनों के 65 से अधिक भजनों का संग्रह है प्रताप के पास

नैनीताल। सरोवर  नगरी आज के दौर में जहाँ अधिकांश लोग नाम तथा पैसा और पहचान की दौड़ में व्यस्त हैं वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बिना किसी दिखावे के चुपचाप अपनी भक्ति में लीन रहते हैं।
बता दें यह कहानी एक ऐसे ही साधारण व्यक्ति की है जिसकी लगन और समर्पण उसे असाधारण बनाते हैं। प्रताप सिंह नगरकोटी पिछले 15 से 20 वर्षों से अपने मन में उठने वाली भावनाओं को भजनों के रूप में ढालता आ रहे है। इनके पास न कोई बड़ा मंच है और न ही कोई विशेष पहचान लेकिन भगवान के प्रति अटूट विश्वास और सच्चे दिल से की गई साधना ही इनकी सबसे बड़ी पूंजी है।जब भी मन में कोई भाव उत्पन्न होता है वह स्वत: ही शबदों का रूप ले लेता है और धीरे.धीरे एक सुंदर भजन बन जाता है। यह प्रक्रिया किसी प्रदर्शन का हिस्सा नहींए बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक साधना है।
प्रताप सिंह नगरकोटी ने भगवान श्रीराम, बजरंग बली, साईं बाबा, नीमकरोली महाराज, मां शेरावाली, मां नयना देवी और गणेश जी सहित कई देवी.देवताओं पर 65 से अधिक भजन रचे हैं। हर भजन में अलग.अलग भावनाओं की झलक मिलती है कहीं प्रेमए कहीं समर्पणए कहीं पुकार और कहीं कृतज्ञता।इन भजनों को यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ ॉमर्स पर भी साझा किया गया है हालांकि डिजिटल युग में पहचान बनाना जितना आसान दिखता है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। अब तक इन्हें वह पहचान और समर्थन नहीं मिल पाया हैए जिसकी ये सच्चे मन से अपेक्षा रखते हैं लेकिन असली प्रश्न यह नहीं है कि पहचान मिली या नहीं। असली सवाल यह है कि कया भक्ति सच्ची है और इसका उत्तर है नि:स्संदेह  यह सफर केवल भजन लेखन तक सीमित नहीं है बल्कि आत्मिक शांति और संतोष प्राप्त करने की एक यात्रा है। यह एक ऐसी साधना है जिसमें किसी प्रकार का लोभ नहीं बल्कि केवल प्रेम और समर्पण है।

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