May 3, 2026
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इंदर आर्या की शानदार प्रस्तुति से झूमे छात्र छात्राएं 

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-गुलाबी शरारा–,माथू माथू—, बोल हीरा बोल—, हे मधु—  व मुखुड़ी बे चुनरी जैसे लोकप्रिय गीतों ने कार्यक्रम में लगाए चार चांद

भीमताल नैनीताल । ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटीए भीमताल परिसर में प्रसिद्ध कुमाऊँनी लोकगायक इंदर आर्या की शानदार लाइव प्रस्तुति ने संगीतए संस्कृति और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
बता दें  शांत पहाडिय़ों के बीच बसे परिसर ने एक यादगार सांस्कृतिक संध्या का रूप ले लिया जहां हर ओर उत्साह, उल्लास और लोकधुनों की मधुर गूंज सुनाई दी। यह आयोजन परंपरा और आधुनिकता के सुंदर मेल का प्रतीक बनाए जिसने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे का कार्य किया।कार्यक्रम की शुरुआत से ही विद्यार्थियों और दर्शकों में भारी उत्साह देखने को मिला। जैसे ही इंदर आर्या मंच पर पहुंचे पूरा परिसर तालियों, नारों और जोशीले स्वागत से गूंज उठा। अपनी मधुर आवाजए दमदार प्रस्तुति और पहाड़ों की संस्कृति से गहरे जुड़ाव के लिए प्रसिद्ध इंदर आर्या ने एक के बाद एक लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बना दिया।
उनके चर्चित गीत गुलाबी शरारा की धुन बजते ही छात्र.छात्राएं झूम उठे और पूरा परिसर एक स्वर में गीत गाता नजर आया। इसके बाद माथू माथू, बोल हीरा, हे मधु मशकबीन और मुखुड़ी बे चुनरी जैसे लोकप्रिय गीतों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। हर गीत के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया और विद्यार्थी संगीत की धुनों पर थिरकते नजर आए।इंदर आर्या की प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही बल्कि यह उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावशाली माध्यम बनी। उनके गीतों ने विद्यार्थियों में अपनी मातृभूमिए भाषा और सांस्कृतिक पहचान के प्रति गर्व की भावना को और मजबूत किया।
विश्वविद्यालय द्वारा क्षेत्रीय कलाकारों को मंच प्रदान करना स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ.साथ अपनी संस्कृति को समझने और उससे जुडऩे का अवसर भी प्रदान करते हैं।कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों और उपस्थित जनसमूह के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। यह शाम केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं बल्कि अपनत्व, संस्कृति और यादगार पलों का उत्सव बन गई। इंदर आर्या की मधुर प्रस्तुति की गूंज देर तक भीमताल की वादियों और विद्यार्थियों के दिलों में बनी रही।

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