September 25, 2026
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‘युवा कलमकार सम्मान’ से पुरस्कृत कहानी

‘बावर की वनकन्या’ पर साहित्यिक परिचर्चा का किया आयोजन

नैनीताल। सरोवर नगरी में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, डी. एस. बी. परिसर, नैनीताल में शोधार्थी हिमांशु विश्वकर्मा की उत्तराखंड भाषा संस्थान के ‘युवा कलमकार सम्मान’ 2026 से पुरस्कृत कहानी ‘बावर की वनकन्या’ पर साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभाग के समस्त प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी। परिचर्चा के दौरान हिन्दी के विभागाध्यक्ष प्रो. शिरीष कुमार मौर्य ने कहानी के रचनात्मक संदर्भों को स्पष्ट करते हुए जौनसार-बावर क्षेत्र की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की कई कुप्रथाएं सामाजिक यथार्थ का हिस्सा रही हैं, हिमांशु विश्वकर्मा की यह कहानी इसी संवेदनशील और जटिल यथार्थ को अत्यंत मुखरता और ईमानदारी के साथ सामने लाती है। प्रो. मौर्य ने उपस्थित शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों को रचनात्मक लेखन तथा समीक्षा, शोध-लेखन व आलोचनात्मक दृष्टि विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हिमांशु विश्वकर्मा से कहा कि किसी भी रचना का महत्व केवल पुरस्कार से नहीं, बल्कि एक सक्षम संपादकीय दृष्टि से गुजरकर प्रतिष्ठित मंच पर प्रकाशित होने से अधिक बढ़ता है। इस अवसर पर मेधा नैलवाल ने हिमांशु विश्वकर्मा के रचनात्मक संघर्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और कविता, कहानी, अनुवाद तथा आलोचनात्मक शोध जैसे विविध क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय हैं। विभाग के सभी सदस्यों ने हिमांशु विश्वकर्मा उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर प्रो. चन्द्रकला रावत, डॉ. शुभा मटियानी, डॉ. मथुरा इमलाल, डॉ. कंचन आर्या, डॉ. दीक्षा मेहरा शोधार्थियों तथा साहित्य-रुचि रखने वाले विद्यार्थियों की सहभागिता रही।

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