October 2, 2026
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बसंत इंटीग्रल लिविंग मेला अरविंद आश्रम में हुआ आयोजित

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मेले का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान, हस्तकला और अनुभवात्मक शिक्षा को एक मंच पर लाना

नैनीताल। सरोवर नगरी में 23 मार्च 2026 को “बसंत इंटीग्रल लिविंग मेला-2026” का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम मुख्य रूप से औरो यूनिवर्सिटी –सूरत गुजरात के बैचलर ऑफ डिज़ाइन (बचेलर ऑफ़ डिज़ाइन ) द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया था, जो वन निवास में आयोजित एक शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक कैंप के अंतर्गत यहाँ आए हुए थे।
इस मेले का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान, हस्तकला और अनुभवात्मक शिक्षा को एक मंच पर लाना तथा प्रतिभागियों को प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन के महत्व से जोड़ना था।
यह मेला तल्ला रामगढ़ स्थित मधुबन श्री अरविंद आश्रम से प्रेरित “खुशहाली समूह” का एक सजीव विस्तार था। इस पहल के अंतर्गत ‘मधुबन श्री अरविन्द आश्रम’ की प्रेरणा से तल्ला रामगढ़ में 70 से अधिक महिलाएं और पुरुष पारंपरिक कलाओं और कौशलों को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर खुशहाली समूह की 6 महिलाओं—मंजू मेहरा, कामिनी रावत, गीता बिष्ट, भावना साह, गुंजन मेहरा और राधा बिष्ट—ने अपनी पारंपरिक कला और कौशल का सजीव प्रदर्शन किया। इन सभी महिलाओं ने न केवल अपनी हस्तकला का प्रदर्शन किया, बल्कि प्रतिभागियों को इन कलाओं की बारीकियों को समझाया और उन्हें स्वयं करके सीखने के लिए प्रेरित भी किया।
इसके साथ ही बांस से टोकरियाँ बनाने वाले कुशल कारीगर श्री लीलाधर जी ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने बांस को आकार देते हुए प्रतिभागियों को यह दिखाया कि किस प्रकार पारंपरिक तकनीकों के माध्यम से उपयोगी और सुंदर वस्तुएँ तैयार की जाती हैं। उनकी कुशलता और अनुभव ने सभी को अत्यंत प्रभावित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत शांतिपूर्ण वातावरण में गायत्री मंत्र के उच्चारण से हुई, जिसके पश्चात तिलक समारोह द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। इस मेले की विशेषता यह रही कि इसमें केवल प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि प्रतिभागियों के लिए ‘हैंड्स-ऑन’ गतिविधियों की भी व्यवस्था की गई थी। प्रतिभागियों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर उन्हें ऐपण, क्रोशिया, बास्केट बुनाई तथा पारंपरिक विधि से हिमालयी नमक बनाने जैसी गतिविधियों को स्वयं करने और समझने का अवसर दिया गया।
औरो यूनिवर्सिटी के बैचलर ऑफ डिज़ाइन द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इन गतिविधियों में भाग लिया और स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर इन पारंपरिक विधाओं को नजदीक से समझा। इस सहभागिता ने उनके लिए सीखने को एक जीवंत और व्यावहारिक अनुभव में परिवर्तित कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान “गेंदे के फूल की कहानी” के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस कहानी ने यह दर्शाया कि कैसे एक साधारण गतिविधि के माध्यम से बच्चों में गणित, भाषा, विज्ञान और प्रकृति के प्रति जिज्ञासा का विकास स्वाभाविक रूप से हो सकता है।
मेले में प्रदर्शित हस्तनिर्मित उत्पादों ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रतिभागियों ने इन उत्पादों को न केवल सराहा, बल्कि उन्हें खरीदकर स्थानीय कारीगरों का उत्साहवर्धन भी किया।
इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट रूप से दर्शाया कि शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हमारे दैनिक जीवन, अनुभवों और आसपास के वातावरण में समाहित होती है।
झोड़ा नृत्य और पारंपरिक पहाड़ी गीतों की मधुर प्रस्तुतियों के साथ यह मेला हर्षोल्लास एवं आत्मीयता के वातावरण में संपन्न हुआ।
नैनीताल से मनोज साह जगाती(सभासद)/अमित सुठा/अर्पित जोशी/पुरन सिंह बगड़वाल/आयुष मेहरा/सुमित पाठक

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