September 30, 2026
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उत्तराखंड की ऊर्जा सुरक्षा को निजी हाथों में बेचने की साजिश

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सरकार जनता के भविष्य से कर रही है खिलवाड़-यशपाल आर्य

नैनीताल। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़ी बहुमूल्य भूमि को न्यकपट के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपने का निर्णय प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा, राज्यहित और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ एक खतरनाक और अल्पदृष्टि भरा कदम है। यह निर्णय सीधे तौर पर उत्तराखंड की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को कमजोर करने और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी मुनाफाखोरों के हवाले करने की साजिश प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि शासनादेश दिनांक 03 दिसंबर 2025 के तहत उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाकपत्थर एवं ढालीपुर स्थित परियोजनाओं से संबंधित 76.7348 हेक्टेयर भूमि को न्प्प्क्ठ को हस्तांतरित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन को भूमि का दाखिल-खारिज, सीमांकन एवं अधिग्रहण करने के आदेश देना यह साबित करता है कि सरकार बिना जनहित की परवाह किए इस फैसले को जबरन थोपने पर आमादा है।
श्री आर्य ने बताया कि यह भूमि कोई साधारण संपत्ति नहीं है, बल्कि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से उत्तराखंड की जल विद्युत परियोजनाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षित की गई रणनीतिक परिसंपत्ति है। इसी क्षेत्र से यमुना स्टेज-1, यमुना स्टेज-2, व्यासी, लखवाड़, किशाऊ, टौंस जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं का संचालन और निर्माण जुड़ा हुआ है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना लगभग असंभव है, और सरकार इस सच्चाई से भली-भांति अवगत है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि यह भूमि निजी हाथों में चली गई, तो प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न होगा, बिजली उत्पादन की भविष्य की योजनाएं ठप हो सकती हैं और भारत सरकार की यमुना पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत लखवाड़ एवं किशाऊ जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह केवल प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि राज्य के रणनीतिक संसाधनों को कमजोर करने का गंभीर षड्यंत्र है।
श्री आर्य ने कहा कि मैं राज्य सरकार से इस जनविरोधी और राष्ट्रविरोधी निर्णय को तत्काल निरस्त करने की मांग करता हूँ। यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो हम जन आंदोलन, सड़क से सदन तक संघर्ष और हर संवैधानिक मंच पर विरोध दर्ज कराएंगे। उत्तराखंड की ऊर्जा संपत्तियों को निजी हाथों में लूटने की इजाजत किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह लड़ाई केवल भूमि की नहीं, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य, ऊर्जा सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।

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