October 5, 2026
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ऊर्जा, कार्यात्मक सामग्री, अणु और

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नैनो टेक्नोलॉजी पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

नैनीताल सरोवर नगरी में ऊर्जा, कार्यात्मक सामग्री, अणु और नैनो टेक्नोलॉजी पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 20 से 22 मार्च 2025 तक हार्मिटेज मे आयोजित है। शुक्रवार को सम्मेलन के दूसरे दिन इस कार्यक्रम के दौरान विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर चित्रा पांडेय मैम, डीन साइंस कुमाऊं यूनिवर्सिटी, और प्रो .एस पी एस मेहता ने कार्यक्रम को प्रारंभ किया, और उसके उपरांत कीनोट स्पीकर पद्मश्री प्रो. टी. प्रदीप को आमंत्रित किया। उन्होंने वॉटर ड्रॉपलेट ऐंड आईस साइंस फॉर सस्टेनेबिलिटी पर व्याख्यान दिया

जल शोधन के लिए संधारणीय नैनोमटेरियल बड़े कारगर है

पद्मश्री प्रो. टी. प्रदीप ने अमृत नामक एक अभूतपूर्व नैनो-प्रौद्योगिकी-आधारित जल शोधन समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया की यह तकनीक पानी से आर्सेनिक, आयरन और यूरेनियम को प्रभावी ढंग से हटाती है, जिससे उनकी सांद्रता अनुमेय पेयजल सीमा से नीचे आ जाती है। अमृत वर्तमान में 1.3 मिलियन लोगों को प्रतिदिन 80 मिलियन लीटर शुद्ध पानी उपलब्ध कराता है, जिसकी कीमत 2 पैसा प्रति लीटर है, जो इसे विश्व स्तर पर सबसे किफायती जल शोधन प्रणाली बनाता है। इस तकनीक को बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्वीकृति मिल गई है।
पद्मश्री प्रो. प्रदीप ने बताया कि उनका शोध जल बूंदों और बर्फ निर्माण में होने वाले मौलिक रसायन विज्ञान में शामिल है
एन सी एल के डॉ गणेश पांडे ने कहा कि ने कहा नैनोटेक्नोलॉजी आधारित जल शोधन संदूषक संवेदन और मौलिक जल रसायन विज्ञान में उन्होंने योगदान का वैज्ञानिक प्रगति और व्यावहारिक अनुप्रयोग दोनों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव है । उनका शोध स्वच्छ जल की सुलभता में नवाचार को बढ़ावा देता है, जिससे लाखों लोगों के जीवन पर ठोस प्रभाव पड़ता है ।
उन्होंने एंजाइमोसाइक्लो हेपटानोन स्कैफोल्ड और स्टीरियोकेमिकल फ्रेमवर्क जैसी नवीन रणनीतियों पर जोर दिया, जो जटिल आणविक संरचनाओं के निर्माण को अधिक कुशल बनाती हैं। इन नवाचारों में फार्मास्युटिकल विकास और जैव चिकित्सा अनुसंधान की अपार संभावनाएँ हैं। प्राकृतिक उत्पाद, आधुनिक कार्बनिक रसायन विज्ञान को आकार देने में सहायक रहे हैं। उनकी जटिल संरचनाएँ सिंथेटिक मार्ग विकसित करने में चुनौती और अवसर दोनों प्रस्तुत करती हैं। व्याख्यान में जटिल अल्कलॉइड संश्लेषण के लिए नवीन रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, जिनमें असममित विसंकेतन और ऑप्टिकली सक्रिय एजाबिसाइक्लो हेप्टानोन के उपयोग को रेखांकित किया गया। इसके पश्चात तिन समानांतर तकनीकी सत्र चलाए गए ।20 आमंत्रित वैज्ञानिकों ने व्याख्यान दिया
तकनीकी सत्रों के पश्चात पोस्टर प्रस्तुति(66) की गई । आज के पोस्टर प्रस्तुति में डॉ ए सामंतु, डॉ वसुधा अग्निहोत्री, डॉ मनीषा (डी यू) प्रो सुमन कुरुक्षेत्र, डॉ पुष्पेंद्र कुमार, डॉ आशीष भटनागर रहे । इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में प्रो नंद गोपाल साहू, प्रो चित्रा पांडे, प्रो गीता तिवारी, डॉ महेश आर्या,प्रो. ए. बी. मेलकानी, प्रो. ललित तिवारी, प्रो विजय कुमार ,डॉ. ललित मोहन, डॉ. सोहेल जावेद, डॉ. मनोज धूनी, डॉ. आंचल अनेजा, , डॉ. भावना पंत, डॉ. दीपशिखा जोशी, डॉ. आकांक्षा रानी, प्रो. एच. मिश्र, प्रो. मोहन सिंह मेहता, डॉ. गिरीश खर्कवाल, डॉ. चेतना तिवारी, डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. सुनील ढाली, डॉ. भास्कर बोरा, प्रो. ओम प्रकाश पंतनगर, डॉ अनर बान डंडापथ, डॉ महेंद्र राणा ,प्रो एंथनी, प्रो निशा फातमी, प्रो पी कुंभकर, डॉ आशीष भटनागर, मनीषा जोशी , आयशा सिद्दीकी, गरिमा चंद ,अभिषेक मेहरा,रुचि बसेड़ा, भावना त्रिपाठी, कारुण्या पपने सहित अन्य लोग उपस्थित रहे ।

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