October 19, 2026
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राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जो दलित है

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उनकी जनसभा के बाद सभा स्थल को ‘अशुद्ध’ मानकर उसका शुद्धिकरण करने की मानसिकता आखिर किस सोच का प्रतीक है? नेता प्रतिपक्ष: यशपाल

नैनीताल हल्द्वानी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी की रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सभा स्थल का कथित रूप से ‘शुद्धिकरण’ किए जाने को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा इस घृणित कृत्य को सही ठहराया जाना भाजपा की मानसिकता और उसकी राजनीतिक सोच को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
सवाल यह है कि लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो दलित समुदाय से आते है उनकी जनसभा के बाद सभा स्थल को ‘अशुद्ध’ मानकर उसका शुद्धिकरण करने की मानसिकता आखिर किस सोच का प्रतीक है?

यह केवल एक राजनीतिक दल या नेता का अपमान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और राजनीतिक सहिष्णुता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

और इससे भी गंभीर विषय यह है कि आज की तारीख तक शासन और प्रशासन की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। क्या सत्ता के संरक्षण में भाजपा कार्यकर्ताओं को कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से ऊपर समझा जा रहा है?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा कथित ‘शुद्धिकरण’ को सही ठहराना इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह किसी एक कार्यकर्ता की व्यक्तिगत हरकत थी, या फिर भाजपा नेतृत्व की स्वीकृति और विचारधारा का हिस्सा?

हम सरकार और प्रशासन से स्पष्ट जवाब चाहते हैं—

सभा स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ के मामले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या प्रशासन ने इस घटना का संज्ञान लिया है?
यदि लिया है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा इस कृत्य को सही ठहराए जाने पर सरकार का क्या रुख है?
क्या लोकतांत्रिक कार्यक्रमों और विपक्षी नेताओं के प्रति ऐसी भाषा एवं व्यवहार को सरकार स्वीकार करती है?

कानून का राज तभी सार्थक है जब वह सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए समान हो। यदि विपक्ष के किसी कार्यक्रम के बाद इस तरह की कार्रवाई होती है और सत्ता पक्ष के नेता उसे सार्वजनिक रूप से सही ठहराते हैं, जबकि प्रशासन मौन रहता है, तो यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि शासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल है।

हम मांग करते हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाए।

भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह संविधान और लोकतंत्र की राजनीति करना चाहती है या नफरत, भेदभाव और सामाजिक विभाजन की राजनीति।

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