July 2, 2026
ww yyyy ppp new pp lll mkl 444 555
666 777 888

कुमाऊं विश्ववि‌द्यालय के डीएसबी कैंपस सांख्यिकी विभाग द्वारा

0
012 013
111 222 333

सांख्यिकी दिवस पर ‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का हुआ आयोजन

नैनीताल। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर, डीएसबी कैंपस कुमाऊं विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग द्वारा आज ‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना’ (अनलॉकिंग पॉटशियल ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटिव डाटा ) विषय पर एक ऑनलाइन वेबिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांख्यिकी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एम सी जोशी द्वारा किया गया। बता दे इस वेबिनार में विभाग के शिक्षकों तथा परास्नातक के छात्र छात्राओं और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों में साइलो (विभिन्न विभागों में अलग-अलग) में पड़े प्रशासनिक रिकॉर्ड्स को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करना और साक्ष्य-आधारित सुशासन (Evidence-based Governance) को बढ़ावा देना था। सेमीनार के मुख्य अतिथि अध्यक्ष प्रोफेसर एम सी जोशी ने कहा सांख्यिकी के अनुप्रयोगों पर अपने विचार प्रस्तुत करे। डा स्पर्श भट्ट कहा, “प्रशासनिक डेटा एक ऐसी छिपी हुई राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसका सही उपयोग नीति निर्माण की गति को कई गुना बढ़ा सकता है। पारंपरिक और समय लेने वाले सर्वेक्षणों के बजाय, अगर हम मौजूदा प्रशासनिक डेटा का सुरक्षित उपयोग करें, तो हम नागरिकों के कल्याण के लिए सटीक और त्वरित निर्णय ले सकते हैं।”
वेबिनार के दौरान वक्ताओं ने प्रशासनिक डेटा के सफल उपयोग के लिए तीन मुख्य स्तंभों पर चर्चा कीः डेटा इंटरऑपरेबिलिटी (डेटा का आपसी जुड़ाव): विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बिखरे हुए डेटाबेस को एक साथ जोड़कर वास्तविक समय (रियल – टाइम ) के सामाजिक-आर्थिक संकेतक तैयार करना। और गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोपरिः डेटा सुरक्षा के वैश्विक ‘फाइव सेफ्स’ (फाइव सफ़ेस ) ढांचे को लागू करना और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना, ताकि नागरिकों की गोपनीयता सुरक्षित रहे। स्थानीय स्तर पर डेटा साक्षरताः जमीनी स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए मानकीकृत टूलकिट तैयार करना और “डेटा चैंपियंस” नियुक्त करना, ताकि डेटा का सही विश्लेषण और उपयोग हो सके। इस ऑनलाइन वेबिनार में सफल वैश्विक उदाहरणों जैसे भारत के आधार-संबद्ध डीबीटी (DBT), आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), (UIADI) आधार एनएचएस (NHS) और न्यूयॉर्क के शहरी नियोजन मॉडल पर भी चर्चा की गई, कि कैसे प्रशासनिक डेटा का उपयोग करके सार्वजनिक सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाया गया है। इस मौके पर
वेबिनार में पंकज शर्मा, भाविका लोहनी, कल्पना कोरंगा, कविता मेहता, कविता चौहान, मानसी सूठा, मेघा रानी, पूजा नायक, शिवानी नेगी, कल्पना रावत कल्पना वालिया तथा अन्य वक्ताओं ने पीपीटी के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत करे । वेबिनार में डा भारत रत्न ने प्रोफेसर महानालोबिस के जीवन एवं सांख्यिकी विषय में उनके योगदानों पर प्रकाश डाला तथा धन्यवाद ज्ञापन दिया। वेबिनार का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि प्रशासनिक डेटा को एक सार्वजनिक हित (पब्लिक गुड ) के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।

999 010 011 zzz

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *