October 29, 2026
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जंगलों में आग लगना कोई नई बात नहीं

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क्या हम आज भी अपनी नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील नहीं हो पाए: खष्टी बिष्ट

नैनीताल। ग्रीष्मकालीन मौसम में जंगलों में आग लगना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर वर्ष बढ़ती वनाग्नि एक गंभीर प्रश्न हमारे सामने खड़ा करती है। पी०सी०सी सदस्य और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री खष्टी बिष्ट ने कहा क्या हम आज भी अपनी नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील नहीं हो पाए हैं? आग लगने का कारण चाहे प्राकृतिक हो या मानवीय, अधिकांश मामलों में कहीं न कहीं मनुष्य की लापरवाही ही जिम्मेदार होती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वन विभाग, पुलिस प्रशासन, शिक्षा व्यवस्था और हमारा आत्मचिंतन नागरिक कर्तव्यों का सही पाठ पढ़ाने में असफल रहे हैं?
नैनीताल , भीमताल, और उसके आसपास के जंगल एक बार फिर धधकते आग की चपेट में हैं। हर साल हजारों पेड़-पौधे, दुर्लभ वनस्पतियाँ और असंख्य जीव-जंतु इस विनाशकारी आग में नष्ट हो जाते हैं। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? क्या वन विभाग द्वारा चलाए जाने वाले “अग्नि सीजन”, “जंगल बचाओ अभियान” और “वन जागरूकता सप्ताह” केवल औपचारिकताएँ बनकर रह गए हैं? यदि इन अभियानों के बावजूद हालात नहीं बदल रहे, तो यह उनकी प्रभावहीनता को ही दर्शाता है।
इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। यदि आज के बच्चे कल के जिम्मेदार नागरिक नहीं बन पा जीरहे हैं, तो यह समाज और शिक्षा दोनों की विफलता है। वन केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर और जीवन का आधार हैं। इन्हें बचाना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

वनाग्नि ग्रीष्मकाल की एक ज्वलंत समस्या है, जिसे केवल आपसी सहयोग, जागरूकता और जिम्मेदारी से ही रोका जा सकता है। दुर्भाग्य से कुछ असंवेदनशील और लापरवाह लोगों की वजह से हर साल हमारी अमूल्य प्राकृतिक संपदा जलकर राख हो रही है। अब समय आ गया है कि सरकारें सख्त कदम उठाएँ, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें और समाज भी अपनी जिम्मेदारी समझे। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब हम अपनी इस अनमोल प्राकृतिक विरासत को हमेशा के लिए खो देंगे।

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