April 27, 2026
yyyy ppp IMG-20260114-WA0002 pp lll mkl 444 555
666 777 888

महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नियत साफ नहीं:  पूर्व सीएम हरीश रावत

0
1003770650
012 013
111 222 333

नैनीताल । सूबे के पूर्व सीएम हरीश रावत ने रविवार को नैनीताल में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर केन्द्र सरकार की नीयत बिल्कुल भी साफ  नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष २०२३ में जब आरक्षण बिल पास किया गया तो तब केन्द्र ने इसे जनसंखया के साथ जोड़ दिया था।
पूर्व सीएम रावत ने कहा कि महिला आरक्षण पर चल रहे विवाद के मामले में उत्तराखंड एक माडल प्रस्तुत कर सकता है और वह आने वाले २०२७ के विधानसभा चुनाव में महिलाओं के लिये ३३ फीसदी
आरक्षण का उदाहरण पेश कर सकता है। रावत ने कहा कि जब मोदी सरकार पर जन दबाव बढ़ा तो आनन फ ानन में महिला आरक्षण बिल लाया गया और उसे परिसीमन के साथ जोड़ दिया गया और उसका पास न होने की ठीकरा विपक्ष पर फ ोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह संसद की ५४३ सीटों पर ही ३३ फीसदी महिला आरक्षण घोषित करे। रावत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार इस मामले में देश में सबसे पहले पहल करे और २८ अप्रैल (मंगलवार) को बुलाये गये विधानसभा के विशेष सत्र में महिलाओं को ३३ फीसदी आरक्षण देने की घोषणा करे। रावत ने दावा किया कि वह कांग्रेस और भाजपा के साथ ही सभी विपक्षी दलों से इसमें साथ देने की अपील कर रहे हैं।
पूर्व सीएम रावत ने देवभूमि उत्तराखंड में आग (वनाग्नि) और बाघ/तेदुएं (मानव वन्य जीव संघर्ष) के साथ ही जाम (यातायात) के मामले में भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे प्रदेश भाजपा सरकार की देन बताया। उन्होंने कहा कि वनों में आद्र्रता खत्म हो गयी है और इससे वनाग्नि की घटनायें बढ़ रही हैं।  रावत ने कहा कि उनकी सरकार ने वनों में आद्र्रता के लिये चाल -खाल  और मेरा वृक्ष -मेरा धन योजना संचालित की थी लेकिन वर्ष २०१७ में भाजपा सरकार ने दोनों योजनाओं को रोक दिया। जिससे वनों में नमी खत्म हो गयी और फ लस्वरूप आग की घटना सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ग्रामीणों पर हो रहे बाघ के हमले को रोकने और यातायात जाम पर लगाम लगाने के लिये भी सरकार के पास न तो कोई विजन है और न ही कोई ठोस योजना है। रावत ने सूबे में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही बिक्री पर चिंता जताते हुए इससे देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति भी खतरे में है। जमीन नहीं रहेगी तो संस्कृति भी नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि २०२७ में आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में यदि कांग्रेस की सरकार आयेगी तो उनकी सरकार अप्रवासियों द्वारा खरीदी गयी जमीनों की समीक्षा करेगी। पत्रकार वार्ता में पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल,हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवकता अवतार सिंह,अनुपम  कबडवाल,कमलेश तिवारी, संजय कुमार,संजीव,सुनील कुमार,रमेश लाल,राजेंद्र व्यास,शार्दुल नेगी व मनोज बिष्ट आदि मौजूद रहे।

999 010 011 zzz

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *