October 3, 2026
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कुमाऊँ विश्वविद्यालय के भीमताल परिसर में

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दो दिवसीय ‘लाइफ स्किल्स’ कार्यशाला हुई प्रारंभ

भीमताल नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, भीमताल परिसर, नैनीताल के प्रबंधन अध्ययन विभाग में आज से दो दिवसीय लाइफ स्किल्स कार्यशाला की शुरुआत हुई। यह कार्यशाला पीएम-यूएसएचए (मेरु) पहल के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ जीवन और करियर में सफलता के लिए आवश्यक कौशलों से सशक्त बनाना है। इस कार्यशाला में एमबीए, फार्मेसी तथा बायोटेक्नोलॉजी विभागों के कुल 155 छात्र-छात्राएँ भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.एस. रावत द्वारा छात्रों को शुभकामना संदेश दिया गया।
कार्यशाला की विशेषज्ञ दामिनी जुयाल रही, जो एक अनुभवी कॉर्पोरेट ट्रेनर, नेतृत्व कोच और पब्लिक स्पीकिंग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने पहले दिन विद्यार्थियों को प्रभावी संवाद, आत्मविश्वास, अंतरव्यक्तिगत संबंध, संघर्ष समाधान, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान, लचीलापन और ग्रोथ माइंडसेट जैसे विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
सुश्री जुयाल ने संवाद को स्पष्ट और आत्मविश्वासी बनाने के महत्त्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलताओं को अवसर में बदलना और कठिन परिस्थितियों से सीख लेना ही वास्तविक प्रगति का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को भूमिका-अभिनय (role play), समूह चर्चा, केस स्टडी और सहयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से इन कौशलों को व्यावहारिक रूप से सीखने का अवसर प्रदान किया। विद्यार्थियों ने समूहों में विभिन्न समस्याओं का विश्लेषण कर उनके रचनात्मक समाधान प्रस्तुत किए, जिससे उनमें टीम वर्क और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण का विकास हुआ। अपने सत्र में सुश्री जुयाल ने कहा, “जीवन कौशल कोई विकल्प नहीं बल्कि सफलता का मूल आधार हैं। संवाद से विश्वास स्थापित होता है, आलोचनात्मक चिंतन निर्णय क्षमता को सुदृढ़ करता है और लचीलापन हर असफलता को सफलता की नई सीढ़ी में बदलने की शक्ति देता है। बता दे यह पहल विद्यार्थियों को अनुभवात्मक शिक्षा से जोड़ने और उन्हें उद्योग की वास्तविक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम है।पहले दिन की समाप्ति पर विद्यार्थियों ने अनुभव साझा किए और कहा कि संवाद तथा लचीलापन संबंधी सत्र विशेष रूप से प्रेरक और उपयोगी रहे। कार्यशाला ने उनमें आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार किया। कार्यशाला के समन्वयक प्रो ललित तिवारी ने बताया कि उक्त कार्यशाला का
आयोजन मेरु के अंतर्गत कुमाऊँ विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। बता दें कार्यशाला के दूसरे दिन, 11 सितम्बर को, नेतृत्व क्षमता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, समय प्रबंधन, अनुकूलन क्षमता और टीम वर्क जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। इनसे विद्यार्थियों की सामूहिक कार्य क्षमता, तनाव प्रबंधन और बदलते व्यावसायिक वातावरण के प्रति अनुकूलन कौशल और अधिक मजबूत होगा। इस अवसर पर डॉ. लक्ष्मण रौतेला, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. दिग्विजय बिष्ट, बी.सी. ध्यानी, श्री आर.सी. तिवारी और किशनंद शर्मा उपस्थित रहे।

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