March 24, 2026
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मुख्यमंत्री ने लिया गंभीर संज्ञान, एनएचएआई

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जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल कार्यवाही के निर्देश

मानवाधिकार आयोग में भी अलग से शिकायत दर्ज कोर्ट भी ले सकती है संज्ञान

हल्दूचौड़ देहरादून। हल्दूचौड़–गोरापाड़व राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109) पर बने मानकविरुद्ध कटों और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे गए शिकायत पत्र पर उनके अपर निजी सचिव जगदीश चंद्र कांडपाल ने त्वरित संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना निदेशालय एवं संबंधित एनएचआईडीसीएल/एनएचएआई अधिकारियों को तत्काल जनहित में कड़ी कार्यवाही के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और अवैध कटों की तत्काल समीक्षा व बंदी सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है, जिससे अब लापरवाह ठेकेदारों और अधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना बढ़ गई है। मुख्य सेवक सदन (मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय)से प्राप्त निर्देशों के अनुसार, निर्माण एजेंसियों को हल्दूचौड़ से गोरापाड़व तक के १५ किलोमीटर के खंड में बने १५ गैर-मानक कटों की सूची एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। इन कटों में सड़क चौड़ाई, सर्विस रोड, स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर और संकेत बोर्ड सहित सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। सचिव कांडपाल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तारीख, स्थान और दुर्घटना विवरण को ध्यान में रखते हुए अवैध कट तुरंत बंद करवाए जाएं और गंभीर लापरवाही पर ठेकेदार एजेंसियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। दरअसल, 17 जुलाई को एक परिवार के स्कूटी से कट पार करते समय ट्रक की चपेट में आने से युवक कन्नू सिंह सम्मल की मौत हुई और उनकी पत्नी व दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इससे दो दिन पूर्व ही व्यापारी दीपक जोशी की तेज रफ्तार वाहन टक्कर में मृत्यु हुई थी। इन घटनाओं पर प्रतिष्ठित अनेक समाचार पत्रों ने मानकविरुद्ध कटों और प्रशासनिक निष्क्रियता का उल्लेख किया था। इन दुर्घटनाओं और राज्य स्तर पर उठे आक्रोश को देखते हुए पीयूष जोशी ने आज ही उपरोक्त घटनाओं व सरकार की उदासीनता को आधार बनाकर उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग को भी विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। अपने पत्र में उन्होंने अनुच्छेद 21 के तहत “जीवन का अधिकार” एवं “मानव गरिमा” के उल्लंघन का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार हो रही जानलेवा दुर्घटनाओं ने आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सीधा चुनौती दी है।
याचिका में जोशी ने मृतकों के परिवारों को न्यूनतम ₹10 लाख तथा गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को ₹5 लाख मुआवजे की मांग की है। जोशी ने आयोग से मांग की है कि सभी अवैध कटों का स्थलीय निरीक्षण आयोग द्वारा स्वयं किया जाए।
जिम्मेदार अभियंताओं, परियोजना प्रबंधकों और ठेकेदारों पर FIR दर्ज की जाए।
भविष्य में किसी भी राजमार्ग पर गैर-मानक कट की अनुमति न दी जाए और एक स्थायी निरीक्षण तंत्र विकसित किया जाए।
वहीं, मानवाधिकार आयोग से उन्होंने अविलंब स्थल निरीक्षण, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी पंजीकरण और दोषियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। आयोग सूत्रों के अनुसार, यदि उनकी शिकायत पत्र आज ही स्व-संज्ञान में ली जाती है, तो जल्द ही मानवाधिकार आयोग की विशेष कार्यवाही और न्यायिक संस्तुति की संभावना है।
आयोग सूत्रों के अनुसार, यदि इस शिकायत को स्व-संज्ञान में लिया जाता है, तो आगामी सप्ताह में विशेष टीम द्वारा मौके का दौरा किया जा सकता है और उच्च स्तरीय अनुशासनात्मक संस्तुति भी दी जा सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी का कहना है, “अब तक केवल आश्वासन मिल रहे थे, लेकिन आज स्पष्ट निर्देशों से आशा जगी है कि न केवल कटों को हटाया जाएगा, बल्कि भविष्य में सड़क सुरक्षा के शीर्ष मानकों का पालन भी सुनिश्चित होगा।” उन्होंने मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग दोनों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आमजन की जान की रक्षा अब प्राथमिकता बनेगी।

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