November 6, 2026
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आईटीईपी द्वारा सम्पादित वार्षिक पत्रिका दीक्षा का विमोचन कुमाऊं विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत द्वारा किया गया

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नैनीताल । कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के डीसीबी परिसर में शुक्रवार को शिक्षा संकाय के अधीन संचालित चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी0) द्वारा सम्पादित वार्षिक पत्रिका दीक्षा का विमोचन कुमाऊं विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत द्वारा किया गया। बता दें कि  इस हेतु आयोजित विशेष कार्यक्रम में शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो0 अतुल जोशी, आईटीईपी के विभागाध्यक्ष डॉ0 अशोक उप्रेती, वार्षिक पत्रिका मुख्य संपादक डॉ0 पुष्पा अधिकारी सहित विभाग के सभी गुरुजन उपस्थित थे। इस अवसर पर  कुलपति प्रो. रावत एवं संकायाध्यक्ष प्रो. जोशी ने पत्रिका के संपादक मंडल और विभाग के सभी गुरुजनों को बधाई देते हुए उनके कार्य की प्रशंसा की और पत्रिका के आगामी संस्करणों को अधिक उपयोगी बनने के लिये सुझाव देते हुए सभी को शुभकामनाऐं प्रेषित की। इस अवसर पर प्रो. अतुल जोशी ने कहा कि कुलपति प्रो.रावत के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में  प्रकाशित यह पत्रिका एक अभिनव प्रयोग है जिसके माध्यम से छात्र छात्राओं को अपनी रचनात्मकता एवं सृजनशीलता को प्रकट करने का सशक्त मंच प्राप्त हो सकेगा। अपनी रचनात्मकता के प्रदर्शन से जहाँ एक ओर छात्र छात्राओं का लेखन कौशल निखरेगा वहीं उनके सामाजिक सरोकारों हेतु किये गए प्रयासों को भी अभिव्यक्ति प्राप्त हो सकेगी जिससे उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों को और बेहतर तरीके से संपादित करने हेतु प्रेरणा प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने पत्रिका के सफल संपादन तथा प्रकाशन के लिए संपादक मंडल सहित समस्त गुरुजनों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने पठन पाठन के साथ ही इस महत्वपूर्ण कार्य को भी यथासमय सम्पन्न किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में यह पत्रिका शिक्षा संकाय सहित विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं के लिए एक आदर्श बनेगी। बता दें कि पत्रिका में विगत वर्ष से ही संचालित हुए चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) विभाग के गुरुजनों और विद्यार्थियों द्वारा लिखित रचनाओं को शामिल किया गया है साथ ही इसमें विभाग द्वारा पूरे वर्ष आयोजित किये गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, अंतर विभागीय प्रतियोगिताओं, जन.जागरूकता कार्यक्रमों इत्यादि को सम्मिलित किया गया है। पत्रिका का मुख्य मकसद भी यही है कि गुरुजन शिक्षा के प्रशिक्षण को प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं का सर्वांगीण विकास किया जा सके।

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