August 18, 2026
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कक्षा से कारोबार तक: देवभूमि उद्यमिता योजना ने सुजल ऐरी को बनाया सफल उद्यमी

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किस कॉलेज के सुजल है छात्र लिंक मैं क्लिक कर जाने खबर में

पिथौरागढ़ नैनीताल। उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी देवभूमि उद्यमिता योजना, जिसे भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद (EDII) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, प्रदेश के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना से जुड़कर अनेक विद्यार्थी अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्यम में बदल रहे हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक सफलता की कहानी संत नारायण स्वामी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणनगर, पिथौरागढ़ के छात्र सुजल ऐरी की है।

वर्तमान में एम.ए. प्रथम सेमेस्टर में अध्ययनरत सुजल ऐरी ने देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण से पहले जहां उनके लिए उद्यमिता एक सामान्य विचार था, वहीं प्रशिक्षण के बाद उन्होंने इसे अपने करियर के एक नए और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा और अपने व्यावसायिक विचार को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाया।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के उद्यमिता विशेषज्ञ डॉ. रजत शर्मा द्वारा विद्यार्थियों को उद्यमिता से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान सुजल ने व्यवसाय शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

सुजल ने अपने उद्यम की शुरुआत प्राकृतिक मसालों एवं पहाड़ी उत्पादों के व्यापार से की है। उनके उद्यम में उत्तराखंड के स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत पहाड़ी दालों, प्राकृतिक मसालों तथा अन्य पहाड़ी उत्पादों का व्यापार किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का यह प्रयास न केवल सुजल के लिए रोजगार का अवसर बना है, बल्कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण उत्पादकों को भी बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

आवासीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान सुजल ने बाजार से जुड़ाव, वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव, व्यवसाय संचालन की रणनीति, सही बाजार एवं ग्राहक की पहचान, उत्पाद की ब्रांडिंग तथा आकर्षक पैकेजिंग जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन जानकारियों ने सुजल को अपने विचार को व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

प्रशिक्षण से प्रेरित होकर सुजल ने अपने व्यवसाय को औपचारिक रूप देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए। देवभूमि उद्यमिता योजना के सहयोग एवं मार्गदर्शन से उन्होंने उद्यम पंजीकरण और खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का लाइसेंस भी प्राप्त किया है। इससे उनके उद्यम को औपचारिक पहचान मिली है और भविष्य में बाजार विस्तार, वित्तीय सहायता तथा अन्य व्यावसायिक अवसरों से जुड़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

संत नारायण स्वामी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणनगर, पिथौरागढ़ की प्राचार्य प्रोफेसर प्रेमलता कुमारी ने सुजल ऐरी की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुजल की सफलता को अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताया।

महाविद्यालय की देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी डॉ. सारिका वर्मा ने कहा कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर उद्यमशील सोच विकसित करना, उन्हें व्यवसाय की व्यावहारिक जानकारी देना और उनके उद्यमों को बाजार, वित्त तथा आवश्यक पंजीकरणों से जोड़ना है। उन्होंने सुजल ऐरी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि योजना के उद्देश्यों की सफल परिणति का उदाहरण है।

प्राचार्य प्रोफेसर प्रेमलता कुमारी, नोडल अधिकारी डॉ. सारिका वर्मा, EDII के उद्यमिता विशेषज्ञ डॉ. रजत शर्मा तथा महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारीगण ने सुजल ऐरी को उनके उद्यम के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

सुजल ऐरी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी केवल नौकरी की तलाश करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी भी बन सकते हैं। यदि विद्यार्थियों को सही समय पर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, बाजार की जानकारी और आवश्यक संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो उनके विचार सफल व्यवसाय का रूप ले सकते हैं।

देवभूमि उद्यमिता योजना का उद्देश्य उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भीतर उद्यमशील सोच विकसित करना, उन्हें व्यवसाय की व्यावहारिक जानकारी देना और उनके उद्यमों को बाजार, वित्त तथा आवश्यक पंजीकरणों से जोड़ना है। सुजल ऐरी की यह उपलब्धि इसी उद्देश्य की दिशा में एक सफल कदम है और प्रदेश के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

सुजल की कहानी संदेश देती है—कॉलेज की पढ़ाई केवल नौकरी की तैयारी तक सीमित नहीं है; सही मार्गदर्शन मिले तो यही शिक्षा अपने सपनों का व्यवसाय खड़ा करने और उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की शुरुआत भी बन सकती है।

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