October 6, 2026
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जोशी के निर्देशन पर

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पी एल वी को दिया स्थाई लोक अदालत का प्रशिक्षण

नैनीताल। सरोवर नगरी में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा निर्देशानुसार एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल / जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी जी के आदेशानुसार सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल पारुल थपलियाल के आदेशानुसार आज दिनांक 17/08/2026 को पी एल वी/अधिकार मित्र को स्थाई लोक अदालत का सम्बन्ध में एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया जिसमें स्थाई लोक अदालत के सदस्यों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया जिसमें
“न्याय सब के लिए कितना आसान, तुरन्त समस्या का समाधान” मंत्र को चरितार्थ करने हेतु राज्य सरकार ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22 (बी) के अन्तर्गत स्थायी लोक अदालत का गठन जनपद नैनीताल में किया है, जिससे जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों का त्वरित रूप से निस्तारण कर, आम जनता, वादकारियों, अधिवक्ताओं एवं जन सामान्य को शीघ्र, सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके।
स्थायी लोक अदालत के लाभ- कोई भी व्यक्ति अदालती मुकदमेबाजी से पूर्व सीधे स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र देकर, न्याय प्राप्त कर सकता है।

  1. यहाँ कोई फीस या न्याय शुल्क नहीं लगेगा।
  2. यहाँ कम समय में विवाद का निस्तारण होगा।
  3. दोनों ही पक्षों के मध्य कोई द्वेष / शत्रुता का भाव मुकदमेबाजी से उत्पन्न नहीं होगा। स्थायी लोक अदालत के निर्णय की कोई अपील किसी भी न्यायालय में नहीं होगी, अर्थात् स्थायी लोक अदालत का निर्णय अंतिम होगा।स्थायी लोक अदालत में पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज (जन उपयोगी सेवाओं) से संबंधित समस्त दीवानी एवं उससे संबंधित शमनीय (Compoundable offences) फौजदारी मामले जिनका अधिकतम विवाद मूल्य एक करोड़ रुपये (1,00,00,000) तक हो और किसी अन्य न्यायालय में लम्बित न हों, उन्हें स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र देकर त्वरित रूप से निस्तारित करवाया जा सकता है।
    जन-उपयोगी सेवाओं के अन्तर्गत वर्तमान में निम्नलिखित मामले आयेंगे-
  4. वायु, सड़क, रेल या जलमार्ग द्वारा यात्रियों या माल के वहन के लिए यातायात सेवा या
  5. डाक, तार या टेलीफोन सेवा या
  6. ऐसा स्थापन जो जनता को विद्युत, प्रकाश या जल का प्रदान कराता है या
  7. लोक सफाई या स्वच्छता प्रणाली स्थापन से संबंधित मामले ।
  8. अस्पताल या औषधालय में सेवा स्थापन से संबंधित मामले।
  9. बीमा सेवा स्थापन से संबंधित मामले 7. शैक्षिक या शैक्षणिक संस्थानों, सेवा स्थापन से संबंधित मामले ।
  10. आवास और भू-संपदा सेवा स्थापन से संबंधित मामले।
  11. बैंकिंग और वित्तीय सेवा से संबंधित मामले।
    स्थायी लोक अदालत ही क्यों? क्यों नहीं उपभोक्ता फोरम (कंज्यूमर फोरम)? दोनों में अन्तर-उपभोक्ता फोरम में केवल “सेवा में कमी” से संबंधित उपभोक्ता मामलों को सुनने का क्षेत्राधिकार होता है। जबकि स्थायी लोक अदालत द्वारा सेवा में कमी के अतिरिक्त जन उपयोगी सेवा से संबंधित मामलों में प्रतिकार के लिए दावा, धन की वसूली एवं उन मामलों से जुड़े शमनीय अपराधिक मामले की सुनवाई का भी क्षेत्राधिकार होता है।उपभोक्ता फोरम के आदेश से पीड़ित पक्ष द्वारा राज्य उपभोक्ता फोरम एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में अपील की जा सकती है, जबकि स्थायी लोक अदालत द्वारा पारित अवार्ड / पंचाट पर कोई अपील नहीं होती अर्थात यह आदेश पक्षकारों पर बाध्यकारी होते हैं। लोक अदालत एवं स्थायी लोक अदालत में अंतर- लोक अदालत में पक्षकार सुलह समझौते के आधार पर अपने मामले का निस्तारण यदि लोक अदालत में नहीं करा पाते हैं तो उस दशा में लोक अदालत को उस मामले को संबंधित मामले को वापस करना पड़ता है, जबकि स्थायी लोक अदालत अपने समक्ष लम्बित जनउपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों में सुलह समझौता विफल होने पर उनका निस्तारण गुण-दोष के आधार पर स्थायी लोक अदालत स्वयं कर सकता है।

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