आइए अपने आसपास ऑक्सीजन बैंक बनाएं पेड़ लगाए

रानीखेत नैनीताल। राजकीय डिग्री कॉलेज रानीखेत के परिसर में वृहद पौधारोपण किया गया। इससे पूर्व जुलाई में भी इस महाविद्यालय में बड़ी संख्या में वृक्षारोपण किया गया था। यहां एक खाली भूमि पर 100 पेड़ों का सघन वन भी तैयार किया जा रहा है। डॉ आशुतोष पन्त
पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी/ पर्यावरणविद मैं कहा मैं प्रधानाचार्य डॉ पुष्पेश पांडे जी का हृदय से आभारी हूं कि उन्होंने मुझे कॉलेज के लिये पौधे उपलब्ध कराने और पौधारोपण में सहभागिता करने का अवसर दिया।
एनसीसी कैडेट्स ने बड़े उत्साह से पौधे लगाने में सहयोग किया। कार्यक्रम में प्रतिभाग के लिये कॉलेज के शिक्षक डॉ पी एन तिवारी, डॉ प्राची जोशी, एनसीसी प्रभारी डॉ लक्ष्मी, कॉलेज स्टाफ कृपाल, उपाध्याय तथा मेरे मित्र डॉ जगदीश सती व वाहन चालक rललित धारियाल को हार्दिक धन्यवाद।
सघन वन लगाने की शुरुआत जापानी वैज्ञानिक डॉ अकीरा मियाबाकी ने की थी। इस विधि में पेड़ों को काफी नजदीक लगाया जाता है। पेड़ों को बढ़ने के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है तो इन घने घने लगाए गए पेड़ों में प्रकाश के लिये संघर्ष होता है और ये जल्दी जल्दी ऊपर को बढ़ते हैं। जो जंगल सामान्यतः 15 / 20 वर्ष में तैयार होता है मियाबाकी विधि से लगाने पर वह 4/5 वर्ष में ही तैयार हो जाता है। जंगल उसे ही कहते हैं जहां पेड़ इतने घने हों कि उनके बीच से गुजरना आसान ना हो। जहां पेड़ों का घनत्व ज्यादा होता है वहां ऑक्सीजन अधिक उत्पन्न होती है, तापमान कम रहता है , तितलियां, भौंरे आकर्षित होते हैं और पक्षी अपना डेरा बनाते हैं। सघन वन बनाने के लिए जरूरी नहीं है कि बहुत अधिक जमीन हो कम जमीन है तो वहां भी कोशिश की जा सकती है। मैंने अभी तक 15 सघन वन लगाए हैं इनमें से 2 तो आधा बीघा से भी कम जमीन पर हैं। यदि कोई स्कूल या संस्था अपने परिसर में सघन वन लगाने की इच्छुक हों तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं। पौधे और तकनीकी सहायता मेरे द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी बस परिसर चारदीवारी से सुरक्षित हो ताकि जानवर पौधों को नुकसान ना पहुंचाएं। अगले दो साल तक सिंचाई की व्यवस्था भी करनी होगी फिर 3 से 5 साल में यहां एक अच्छा घना जंगल तैयार हो जाएगा जो पारिस्थिकी का एक अच्छा नमूना या मॉडल होगा।




















