मूलभूत समस्याओं बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित है खुरपाताल: सामाजिक कार्यकर्ता गौरव गोस्वामी

नैनीताल। किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य को मूलभूत स्तंभ माना जाता है लेकिन नैनीताल विधानसभा के कई नजदीकी ग्रामीण क्षेत्र आज भी इन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की बदहाली और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। सामाजिक कार्यकर्ता
खुरपाताल गौरव गोस्वामी क्या कहना है आगामी विधानसभा चुनाव से से पहले ग्राम वासियों ने कह दिया है
सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का नारा बुलंद ,डोली के भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था :
‘स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह ना के बराबर हैं। यदि कोई आपातकालीन स्थिति पैदा हो जाए, तो मरीजों को जिला अस्पताल या हल्द्वानी ले जाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए आज भी मरीजों को डोली में रखकर पैदल लाना पड़ता है, जो कि आपात स्थिति में बेहद ही जोखिम भरा है। इसके अलावा, क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय विधायक के सामने अपनी समस्या रखी, लेकिन नतीजा हमेशा सिफर ही रहा। ग्रामीणों का कहना है कि नैनीताल की मौजूदा विधायक चुनाव जीतने के बाद जनहित में विकास कार्यों का जायजा लेने उनके गांवों में नहीं आईं।
भाजपा समर्थकों में भी आक्रोश, 2027 चुनाव बहिष्कार की चेतावनी:
2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की हलचल के बीच नैनीताल विधानसभा सीट पर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र के नजदीकी ग्रामीण इलाकों में मौजूदा विधायक के खिलाफ जनता की नाराजगी सातवें आसमान पर है। हालात यह हैं कि आम जनता के साथ- साथ भाजपा का कोर वोटर भी खुलकर मौजूदा विधायक के विरोध में हैं। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि आगामी चुनाव में पार्टी ने चेहरा नहीं बदला, तो भाजपा को भारी नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। कई क्षेत्रों में ग्रामीणों ने चेहरा न बदलने की स्थिति में चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दे डाली है। ‘पार्टी बदले चेहरा, वरना होगी मुश्किल’; स्थानीय लोगों का मानना है कि मौजूदा विधायक ने जनहित और विकास संबंधी कार्यों की लगातार अनदेखी की है। ऐसे में बेहतर होगा कि पार्टी 2027 के चुनाव में किसी दूसरे चेहरे को अवसर दे। वर्तमान स्थिति में यदि संगठन ने इस नाराजगी को समय रहते नहीं समझा और उम्मीदवार नहीं बदला, तो आगामी विधानसभा चुनाव में राह बेहद मुश्किल हो सकती है।




















