कूर्मांचल केसरी बद्रीदत्त पाण्डेय की आज जयंती

कूर्मांचल का इतिहास” नामक ग्रंथ उन्होंने लिखा था
उत्तराखंड के महानायकों में गिने जाते हैं बद्रीदत्त
नैनीतालl कूर्मांचल केसरी बद्रीदत्त पाण्डेय
का जन्म 15 फरवरी 1882 को ( कनखल) हरिद्वार में हुआ और बद्रीदत्त पाण्डेय का मूल निवास एवं शिक्षा स्थल अल्मोड़ा था, बचपन में ही इनके माता-पिता की मृत्यु के बाद वह अल्मोड़ा आ गए थेl बता दें बद्रीदत्त पाण्डेय, उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध इतिहासकार, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्होंने “कूर्मांचल का इतिहास” नामक ग्रंथ लिखा,जिसमें उन्होंने उत्तराखंड (विशेष रूप से कुमाऊं और गढ़वाल) के इतिहास, संस्कृति और समाज पर विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया है,
जो कुमाऊं और गढ़वाल के इतिहास का प्रमाणिक स्रोत मानी जाती है। बद्रीदत्त पाण्डेय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भागीदार थेlबद्री दत्त पांडे का परिवार मूल रूप से अल्मोड़ा के पाटिया का निवासी थाl
उनका देहांत 4 मार्च 1965 को हुआ थाl
कुली बेगार प्रथा:-
ब्रिटिश सरकार ने उत्तराखंड के स्थानीय लोगों पर कुली बेगार (मुफ्त श्रम) करने का अत्याचार थोपा था।
इसमें गांववासियों को जबरन सरकारी अधिकारियों, सैनिकों और ब्रिटिश साहिबों का सामान ढोने के लिए मजबूर किया जाता था।
इसे तीन भागों में बांटा गया था:
कुली उतार: ब्रिटिश अधिकारियों के सामान को सीमा से गांव तक पहुंचाना।
कुली बेगार: बिना वेतन के मुफ्त मजदूरी करवाना।
कुली बर्दायश: थोड़े से पैसे देकर जबरन मजदूरी करवाना।
•बद्रीदत्त पाण्डेय ने इस अन्यायपूर्ण प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को संगठित किया और लोगों ने अल्मोड़ा में सरयू नदी के तट पर अपने नाम से जुड़े कुली रजिस्टर को फेंककर इस प्रथा का बहिष्कार किया।
•इस बड़े विरोध के बाद ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और 1921 में कुली बेगार प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
उन्हें “कूर्मांचल केसरी” की उपाधि दी गई और वे उत्तराखंड के महानायकों में गिने जाते हैं।




















