June 29, 2026
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एआई (AI) शिक्षा का सहायक हो सकता है, लेकिन शिक्षक का विकल्प नहीं: कमल के पांडे 

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तकनीक और भारतीय संस्कारों के समन्वय से नई पीढ़ी का निर्माण करें शिक्षक

डिजिटल युग में शिक्षक की बदलती भूमिका और नई चुनौतियाँ

 नैनीताल। सरोवर नगरी आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञान तक पहुँच को सरल बनाया है। प्रदेश सह-संयोजक, शिक्षक प्रकोष्ठ

भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड के  कमल के. पाण्डेय का मानना है ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विद्यार्थियों को सही दिशा, तार्किक सोच, नैतिक मूल्यों और डिजिटल जिम्मेदारी का मार्गदर्शन देना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। एआई (AI) शिक्षा का सहायक हो सकता है, लेकिन शिक्षक का विकल्प नहीं। तकनीक जानकारी दे सकती है, किंतु संस्कार, संवेदनशीलता, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभाव का संचार केवल शिक्षक ही कर सकता है। डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों को साइबर अपराध, फर्जी सूचनाओं, डेटा सुरक्षा और डिजिटल नैतिकता के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही शोध, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना भी आज के शिक्षक का दायित्व है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को अधिक नवाचारी, तकनीक-सक्षम और शोध-आधारित बनाने की दिशा दिखाई है। इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही हैं। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षक स्वयं भी नई तकनीकों को अपनाते हुए आजीवन सीखने की भावना बनाए रखें। विकसित भारत का निर्माण केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि ऐसे शिक्षकों से होगा जो तकनीक और भारतीय संस्कारों के बीच संतुलन स्थापित कर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करें। यही शिक्षक प्रकोष्ठ का संकल्प भी है।

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