October 1, 2026
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में जिला कारागार मे

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बौद्विक दिव्यांग व्यक्तियों के लिये कानूनी सेवा जागरूकता कार्यक्रम हुआ आयोजित

नैनीताल सरोवर नगरी में मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों और बौद्धिक विकलांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवा इकाई व बालको के लिए कानूनी सेवा इकाई (एल0एस0यू0सी0)सदस्य डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेन्स कॉउन्सिल हेमा शर्मा ,यशवंत कुमार , अंबिका द्वारा जिला कारागार नैनीताल मै जगरूकता शिविर का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के दिशा निर्देशानुसार एवं जिला न्यायाधीश महोदय /अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल प्रशांत जोशी के मार्गदर्शन में सिविल जज (सी०डि०) / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल पारुल थपलियाल के निर्देशन मे , जिला कारागर नैनीताल में मनोन्याय (मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों और बौद्धिक विकलांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवा इकाई ) व बालको के लिए कानूनी सेवा इकाई (एल0एस0यू0सी0)सदस्य डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेन्स कॉउन्सिल श्रीमती हेमा शर्मा , यशवंत कुमार , अंबिका द्वारा मानसिक बीमारी वाले व्यक्ति एवं बौद्विक दिव्यांग व्यक्तियों के लिये कानूनी सेवा (योजना 2024) तथा “बाल अनुकूल कानूनी सेवाएं बच्चों के योजना” 2024 पर जागरूकता शिविर का आयोजन गया। जिसमे डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेन्स कॉउन्सिल हेमा शर्मा द्वारा बंदियों को बताया गया की यह योजना बाल अपराध, बाल विवाह, बाल श्रम और अन्य बाल संरक्षण मामलों से प्रभावित बच्चों को कानूनी सहायता प्रदान करती है, योजना में बाल न्यायालयों के साथ भी सहयोग किया जाता है, ताकि बच्चों को कानूनी प्रक्रिया में आसानी हो.योजना बाल कल्याण संस्थाओं, सम्प्रेषण गृहों, विशेष घरों, बाल न्यायालयों, जेलों, और अन्य जगहों पर रहने वाले बच्चों को सहायता प्रदान करती है. बाल अनुकूल कानूनी सेवाएं बच्चों के लिए योजना” बच्चों को न्याय तक पहुंच और उनकी रक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती है। यह योजना बच्चों को उनकी कानूनी प्रक्रिया में बेहतर तरीके से मदद करती है, उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करती है, और उन्हें एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है.
शिविर मे अंबिका द्वारा मनोन्याय इकाई का कार्य बताते हुए कहा की मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों और बौद्धिक विकलांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवा इकाई का मुख्य कार्य इन विशेष समूहों को मुफ्त, सुलभ और प्रभावी कानूनी सहायता प्रदान करना है। इसका उद्देश्य उनके अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय प्रणाली तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।मुफ्त कानूनी सहायता: कानूनी कार्यवाही में वकीलों की नियुक्ति, अदालती फीस का भुगतान, और गवाहों के खर्चे जैसे सभी कानूनी खर्च इकाई द्वारा उठाए जाते हैं।अधिकारों की सुरक्षा: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम और दिव्यांग अधिकार कानून के तहत इनके सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन की रक्षा करना।शोषण से बचाव: इन्हें अमानवीय, क्रूर व्यवहार या किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से बचाने के लिए त्वरित कानूनी कदम उठाना।संस्थागत सहायता: मानसिक अस्पतालों या पुनर्वास केंद्रों में रहने वाले मरीजों के अधिकारों की निगरानी करना।
शिविर मे यशवंत कुमार द्वारा बन्धियो को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के बारे मे बताते हुए कहा गया की जो मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और सेवाओं को सुनिश्चित करता है और उनके अधिकारों की रक्षा करता है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है और यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार हो, भेदभाव से मुक्त हो। अधिनियम के तहत मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकार:,अग्रिम निर्देश का अधिकार: रोगी यह बता सकता है,कि मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के दौरान बीमारी का इलाज ,कैसे किया जाए या नहीं किया जाए.स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का अधिकार.निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकार.समुदाय में रहने का अधिकार.क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार से सुरक्षा का अधिकार.निषिद्ध उपचार के तहत इलाज न करने का अधिकार.समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार.सूचना का अधिकार.गोपनीयता का अधिकार.,कानूनी सहायता और शिकायत का अधिकार.,मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के बारे में जानकारी का अधिकार. है। उपरोक्त शिविर मे प्रभारी करापाल त्रिलोक आर्य, बंदी रक्षक प्रदीप माझेल, बंदी रक्षक महेंद्र बोहरा, जेल पीएलवी नीलेश कुमार मौजूद रहे।

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