September 22, 2026
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औषधीय पौधों की विविधता एवं स्थिति” विषय पर

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प्रोफेसर ललित तिवारी ने विस्तृत एवं सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया

नैनीताल। महात्मा हंसराज मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, हंसराज कॉलेज एवं गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘रीसेंट ट्रेंड्स इन बायोलॉजी’ रिफ्रेशर कोर्स के अंतर्गत एक अत्यंत ज्ञानवर्धक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो. ललित तिवारी, निदेशक, विजिटिंग डायरेक्टरेट एवं विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, डीएसबी परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल ने “औषधीय पौधों की विविधता एवं स्थिति” विषय पर विस्तृत एवं सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान में प्रो. तिवारी ने औषधीय पौधों को “ग्रीन गोल्ड” के रूप में संबोधित करते हुए उनकी जैव विविधता, पारिस्थितिक महत्व तथा मानव जीवन में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक वर्गीकरण को सरल भाषा में समझाते हुए उनके प्रमुख समूहों एवं उपयोगी प्रजातियों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। साथ ही उन्होंने विभिन्न औषधीय पौधों के पारंपरिक एवं आधुनिक चिकित्सीय उपयोगों की जानकारी दी, जिससे प्रतिभागियों को इस क्षेत्र की व्यापकता का स्पष्ट ज्ञान प्राप्त हुआ।
उन्होंने संकटग्रस्त एवं लुप्तप्राय औषधीय पौधों की प्रजातियों पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया तथा उनके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में उन्होंने पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय को आवश्यक बताया।
विशेष रूप से ‘अष्टवर्ग पौधों’ की अवधारणा को उन्होंने विस्तारपूर्वक समझाया, जो आयुर्वेदिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह विषय प्रतिभागियों के लिए नवीन एवं अत्यंत रुचिकर रहा तथा इससे औषधीय पौधों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता भी उजागर हुई।
व्याख्यान के दौरान औषधीय पौधों की वैश्विक स्थिति, उनकी बढ़ती मांग, उपयोग के बदलते पैटर्न तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवृत्तियों पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है जो लगभग 130 देशों को आपूर्ति करता है।।
इसके अतिरिक्त भारत में औषधीय पौधों की वर्तमान स्थिति, भारतीय हर्बल बाजार के विस्तार तथा इसकी संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने यह भी बताया कि बढ़ती मांग के कारण औषधीय पौधों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे कई प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो रहा है।
अंत में, औषधीय पौधों के क्षरण के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों को रेखांकित करते हुए उनके संरक्षण हेतु प्रभावी रणनीतियाँ एवं सतत प्रबंधन के लिए आवश्यक कार्ययोजनाओं पर बल दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को औषधीय पौधों के महत्व, उनकी वर्तमान स्थिति, संरक्षण आवश्यकताओं तथा सतत प्रबंधन के प्रति जागरूक करना रहा। यह व्याख्यान अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों द्वारा अनेक प्रश्न पूछे गए, जिनका वक्ता ने विस्तारपूर्वक एवं प्रभावी ढंग से उत्तर दिया। यह संवादात्मक चर्चा प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी एवं प्रेरणादायक रही।

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