October 29, 2026
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गंगा शुद्ध चेतना, ज्ञान और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करती हैं प्रो : ललित तिवारी

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नैनीताल। भारतीय संस्कृति, शुद्ध भारतीयता और उसकी आध्यात्मिक चेतना की पहचान मां गंगा हैं। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी और साक्षात ईश्वर का स्वरूप मानी जाती हैं। सनातन परंपरा में गंगा को जीवन, आस्था, शुद्धता और मुक्ति का प्रतीक माना गया है।

आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार गंगा शुद्ध चेतना, ज्ञान और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करती हैं। कहा जाता है कि गंगा स्नान, गंगाजल का सेवन अथवा केवल गंगा-गंगा का स्मरण करने मात्र से भी व्यक्ति पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है। पुराणों में वर्णित श्लोक गंगा गंगेति यो ब्रूयात, योजनानां शतैरपि।

मुच्यते सर्वपापेभ्यो, विष्णुलोके स गच्छति॥

अर्थात सौ योजन दूर से भी गंगा का स्मरण करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त करता है।

मान्यता है कि महाराज भगीरथ की कठोर तपस्या से मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं। भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा के प्रचंड वेग को धारण कर पृथ्वी पर उनके अवतरण को संभव बनाया। इसी कारण किसी कठिन कार्य हेतु किए गए अथक प्रयास को आज भी भगीरथ प्रयास कहा जाता है।

गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। आज ( सोमवार ) को मनाया जाएगा। उत्तराखंड में इस अवसर पर घरों में द्वार पत्र लगाने की परंपरा भी विशेष रूप से निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए इसे गंगावतरण दिवस भी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और पूजा-अर्चना करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप — मानसिक, वाचिक और शारीरिक — नष्ट हो जाते हैं। इस दिन दसों दिशाओं के दिग्पालों की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।

मानसिक शांति और मां गंगा की कृपा प्राप्ति हेतु यह मूल मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी है। उत्तराखंड के गोमुख स्थित गंगोत्री हिमनद से भागीरथी के रूप में निकलकर देवप्रयाग में अलकनंदा से संगम के बाद यह गंगा कहलाती है। लगभग 2525 किलोमीटर की यात्रा करते हुए गंगा ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, बिहार और पश्चिम बंगाल से बहती हुई ब्रह्मपुत्र के साथ मिलकर सुंदरबन डेल्टा का निर्माण करती है, जो विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा माना जाता है।

यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन और दामोदर इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं। गंगा केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा भी है। यह कृषि, सिंचाई, जलविद्युत, जल परिवहन और पर्यटन का प्रमुख आधार है। गंगा अपने साथ हिमालय से उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी लाकर मैदानी क्षेत्रों को अत्यंत उर्वर बनाती है।

वैज्ञानिक शोधों में भी गंगाजल की विशेषताओं को महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि गंगाजल में स्वयं को शुद्ध रखने तथा हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है।

गंगा संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा नमामि गंगे और स्पर्श गंगा जैसे अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य गंगा की निर्मल और अविरल धारा को बनाए रखना है।

गंगा केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आध्यात्मिकता और सभ्यता की आत्मा हैं

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