May 21, 2026
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आज 22 मई अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

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नैनीताल। पृथ्वी पर रहने वाली सभी प्रजातियां मिल कर जैव विविधता का निर्माण करते है । 1985 में वाल्टर रूसेन ने बायोडायवर्सिटी शब्द ईजाद किया जबकि बायोलॉजिकल डायवर्सिटी शब्द को थॉमस लावेजॉय तथा विल्सन ने इसे आगे बढ़ाने का काम किया । 1992 के बाद मानव इसे बेहतर तरीके से समझ पाया है।
पृथ्वी और प्रकृति के प्रति सम्मान का मंत्र में पृथ्वी को माता और स्वयं को उसका पुत्र माना गया है जो जैव विविधता के संरक्षण का मूल आधार है ।माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः अथर्ववेद जिसका अर्थ है भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूं तथा. जल, वायु और पृथ्वी की शुद्धि का श्लोक पर्यावरण और प्रकृति के सभी तत्वों के संतुलन और उनकी रक्षा का संदेश देता है पृथ्वी संतरणात् संतु नः पुन्या पुन्येन वातः पुन्येन अध्युष्ट पुन्या पृथ्वी पुन्येन संतु नः ,ऋग्वेद जिसका अर्थ है हमारे अच्छे कर्मों से पृथ्वी की रक्षा हो, शुद्ध जल से हमारी रक्षा हो, और हमारे पुण्य कर्मों से ही पवन और प्रकृति संरक्षित रहें।
अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस हर वर्ष 22 मई को मनाया जाता है जिसका उद्देश्य हमारी पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और इसके महत्व के प्रति दुनिया में जागरूकता आ सके । सभी जीवधारी मिलकर जैव विविधता बनाते है तथा उनके बीच का आपसी संतुलन और पर्यावरण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2000 में 22 मई को इस दिवस के रूप में घोषित किया गया था। 22 मई 1992 को ही नैरोबी में ‘जैव विविधता पर कन्वेंशन’ ( सी बी डी) को अपनाया गया था जो विलुप्त होती प्रजातियों, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर रोक लगाना विषय पर कार्य करते है । मानव जीवन पूरी तरह से जैव विविधता पर निर्भर है पीने के पानी, शुद्ध हवा, उपजाऊ मिट्टी, भोजन और औषधियां इसी से मिलती है। मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना अति आवश्यक है ।
2026 हेतु जैव विविधता की थीम “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना रखी गई है । जीवो की आनुवंशिक विविधता और पारिस्थितिक तंत्र के समग्र योग को भी जैव विविधता कहते हैं। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार पृथ्वी पर लगभग 8.7 मिलियन प्रजातियाँ (यूकेरियोटिक) मौजूद हैं, जिनमें से अब तक लगभग 1.5 से 2 मिलियन प्रजातियों की ही पहचान और दस्तावेज़ीकरण हो सका है। ब्राजील दुनिया का सबसे अधिक जैव विविधता वाला देश है जहां दुनिया की लगभग 10% प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके बाद कोलंबिया, इंडोनेशिया, चीन और मेक्सिको का स्थान आता है। विश्व में कुल 36 मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं। ये वे क्षेत्र हैं जहां जैव विविधता बहुत अधिक होती है, लेकिन उन पर भारी संकट बना रहता है।भारत विश्व के कुल भूभाग का मात्र 2.4% हिस्सा होने के बावजूद, यहां वैश्विक प्रजातियों का 7-8% हिस्सा पाया जाता है। यहाँ 4 प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट (पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय, इंडो-बर्मा क्षेत्र और अंडमान निकोबार द्वीप समूह) स्थित हैं।
जैव विविधता आनुवंशिक , जातीय एवं पारिस्थितिकी तंत्र विविधता तीन प्रकार की होती है । दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत से अधिक आधुनिक दवाइयाँ पौधों और प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होती हैं जैसे मलेरिया की दवा सिनकोना से ।जलवायु नियंत्रण में स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र और महासागर, कार्बन उत्सर्जन को अवशोषित कर हमारी जलवायु को स्थिर रखते हैं। विविध प्रकार के जीव-जंतु और पौधे परागण जैसी प्रक्रियाओं द्वारा हमारी कृषि और खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं किंतु मानवीय गतिविधियों (वनों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता संकट में है, और विलुप्त होने की इस दर को छठा सामूहिक विलुप्तिकरण भी कहा जा रहा है। इसे बचाने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं इनमें राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण और बायोस्फीयर रिजर्व बनाना तथा राष्ट्र के वैश्विक स्तर पर कई नीतियां लागू की गई हैं।
वैदिक काल से ही सभी प्राणियों (पशु-पक्षी) की रक्षा करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है यत् पृथिव्यां व्रीहि यवो गोषु यद् यद् अस्ति ,तत्सर्वं ते अस्तु भागधेयम् ,ऋग्वेद पृथ्वी पर जो कुछ भी अनाज, वनस्पति, जीव-जंतु और जल आदि मौजूद हैं, उन सभी का समान रूप से आदर करना चाहिए और सभी को अपने हिस्से का जीवन जीने का अधिकार है।
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की विविधता को दर्शाती है, जिसे वर्तमान में आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और आक्रामक विदेशी प्रजातियों से गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है。यह संकट पारिस्थितिकी तंत्र और मानव अस्तित्व दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है。
पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन विभिन्न प्रकार के जीव, पौधे और सूक्ष्म जीव मिलकर पर्यावरण को संतुलित रखते हैं। हमें अपने भोजन के लिए विविध प्रकार की फसलों, अनाजों, फलों और सब्जियों की आवश्यकता होती है। जैव विविधता कृषि की उत्पादकता और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ फसलों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है ।दुनिया की लगभग 40% से अधिक औषधियां पौधों और जीवों से प्राप्त होती हैं। जैव विविधता हमें लकड़ी, रेशे, ईंधन और औद्योगिक कच्चा माल प्रदान करती है। प्राकृतिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बढ़ावा मिलता है।विभिन्न जीवों और वनस्पतियों का अध्ययन वैज्ञानिकों को चिकित्सा, आनुवंशिकी और नई तकनीकों को विकसित करने में मदद करता है ।
जैव विविधता के मूल मंत्र का अर्थ उन प्राथमिक सिद्धांतों और उपायों से है जो पृथ्वी पर मौजूद सभी पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्म जीवों (पर्यावरण) की रक्षा करने के लिए आवश्यक हैं। इसके मुख्य मंत्रों में पौधे लगाना, जीवों का संरक्षण, और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना शामिल है।यहाँ “अधिक से अधिक पौधरोपण” अधिक से अधिक पेड़ लगाना जैव विविधता का सबसे पहला और महत्वपूर्ण मंत्र है। पेड़ न केवल वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास और भोजन प्रदान करते हैं, बल्कि हवा को शुद्ध करके जलवायु को भी स्थिर रखते हैं।जीव-जंतुओं की रक्षा” प्रत्येक जीव का इस पारिस्थितिकी तंत्र में अपना विशेष स्थान है। किसी भी एक प्रजाति के विलुप्त होने से पूरी खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। इसलिए जानवरों, पक्षियों और जलीय जीवों का शिकार रोकना इनका संरक्षण है।”सतत विकास और उपभोग” प्राकृतिक संसाधनों (जैसे- पानी, जंगल, और मिट्टी) का इस्तेमाल सतत विकास के क्रम में हो ये सुनिश्चित करना है । कचरा कम फैलाना और रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) करना इसका हिस्सा है। “प्रदूषण नियंत्रण” भूमि, जल और वायु प्रदूषण को कम करना जैव विविधता के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्लास्टिक का कम उपयोग और रसायनों पर निर्भरता कम करके हम कई सूक्ष्म जीवों और जलीय प्रजातियों को बचा सकते हैं “प्राकृतिक आवासों जंगलों, झीलों, और घास के मैदानों को नष्ट होने से बचाना ही जैव विविधता का मूल मंत्र है।

जैव विविधता केवल मनुष्य, बल्कि प्रकृति, वनस्पति और सभी जीवों के लिए शांति और सद्भाव की प्रार्थना करती है।ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिःपृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिःब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ,यजुर्वेद अर्थात आकाश में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हो, जल और औषधियों में शांति हो, वनस्पतियों में शांति हो, सम्पूर्ण ब्रह्मांड और ईश्वर में शांति हो। हर जगह शांति ही शांति हो। सभी को बधाई ।

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