April 29, 2026
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आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष पर

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उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से की भेंट और सत्संग में सहभागिता की

बेंगलुरु नैनीताल। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने वैश्विक मानवतावादी नेता एवं आध्यात्मिक आचार्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में भेंट की। यह एक विशेष अवसर था, क्योंकि आर्ट ऑफ लिविंग सेवा, आंतरिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण के अपने 45वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
माननीय राज्यपाल का आश्रम परिसर में आत्मीय स्वागत किया गया। इसके पश्चात उन्होंने गुरुदेव के साथ प्रतिष्ठित एम्फीथिएटर में आयोजित विशेष सत्संग में सहभागिता की। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने विशाल हरित परिसर का अवलोकन किया तथा अत्याधुनिक गौशाला का भी दौरा किया, जो देशी नस्लों के संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती है।

माननीय राज्यपाल ने कहा, “मुझे लगता है कि भाषा के मामले में संस्कृत और कंप्यूटर विज्ञान के बीच कोई अंतर नहीं है,” और आगे जोड़ा कि “यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित होकर ‘परम बुद्धिमत्ता’ बनेगी और फिर ‘ब्रह्मांडीय बुद्धिमत्ता’ की ओर अग्रसर होगी,” जो मानवीय चेतना के एक गहरे विकास को दर्शाता है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि मानवता के लिए ऐसा बदलाव अत्यंत आवश्यक है, उन्होंने कहा, “दुनिया को अभी भी और अधिक शांतिपूर्ण बनने की आवश्यकता है,” और अंत में शांति मंत्र का उच्चारण करते हुए अपनी बात समाप्त की, यह याद दिलाते हुए कि “हमारी ज़िम्मेदारी पृथ्वी पर रहने वाले सभी 8 अरब मनुष्यों के प्रति है।”

वर्ष 1981 में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने तनावमुक्त और हिंसामुक्त समाज के संकल्प के साथ आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना की थी। आज यह विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन चुका है, जिसने ध्यान, प्राणायाम, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत, महिला सशक्तिकरण और मानवीय सेवा कार्यों के माध्यम से 182 देशों में 80 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को स्पर्श किया है।

45वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में इंटरनेशनल सेंटर में ध्यान मंदिर के उद्घाटन की तैयारियाँ चल रही हैं, जिसे विश्व के सबसे बड़े ध्यान स्थलों में से एक के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र विश्वभर से आने वाले लाखों साधकों के लिए शांति, उपचार, स्पष्टता और आंतरिक संतुलन का आश्रय स्थल बनेगा।

महीने भर चलने वाले इन समारोहों में शासन, उद्योग, बहुपक्षीय संस्थाओं, शिक्षा जगत, मीडिया, संस्कृति और नागरिक समाज के अग्रणी व्यक्तित्व शामिल होंगे। उद्देश्य है संवाद, सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से अधिक करुणामय, टिकाऊ और परस्पर जुड़ी दुनिया की दिशा में आगे बढ़ना। आर्ट ऑफ लिविंग की उपस्थिति वाले सभी 182 देशों से प्रतिनिधियों के आने की अपेक्षा है।

उत्तराखंड में सेवा और जनकल्याण की मजबूत उपस्थिति

यह भेंट इसलिए भी विशेष रही क्योंकि उत्तराखंड में आर्ट ऑफ लिविंग लंबे समय से मानवीय सेवा और जनकल्याण के कार्यों से जुड़ा रहा है।

वर्ष 2013 की भीषण आपदा के दौरान संस्था के स्वयंसेवकों ने ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रप्रयाग और टिहरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासन के साथ मिलकर राहत शिविरों के संचालन, आवश्यक सामग्री के समन्वय और प्रभावित परिवारों को मानसिक आघात से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 2025 में उत्तरकाशी और धराली में आई फ्लैश फ्लड्स के बाद भी स्वयंसेवक तत्परता से सक्रिय हुए। वायु मार्ग से राशन सामग्री पहुँचाई गई, जबकि सड़क संपर्क टूट जाने पर कंबल, स्टोरेज ट्रंक, स्वच्छता सामग्री, प्राथमिक उपचार किट, सोलर लालटेन और अन्य आवश्यक वस्तुएँ पैदल दुर्गम गाँवों तक पहुँचाई गईं। इन प्रयासों से सैकड़ों परिवारों को राहत मिली।

आपदा राहत से आगे बढ़कर संस्था ने हिमालयी क्षेत्र में वृक्षारोपण, ग्राम संपर्क अभियान, युवा विकास कार्यक्रमों और प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है।

रुद्रप्रयाग जिले में सैकड़ों महिला किसानों ने आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षण के बाद रसायनमुक्त खेती को अपनाया है। स्थानीय संसाधनों से तैयार प्राकृतिक विकल्पों के उपयोग से किसानों ने मिट्टी की सेहत में सुधार, लागत में कमी, पारंपरिक अनाजों की वापसी और आय में वृद्धि का अनुभव किया है।
45 वर्षों का राष्ट्रीय प्रभाव
आज आर्ट ऑफ लिविंग भारतभर में 1,327 निःशुल्क विद्यालय संचालित कर रहा है, जहाँ वंचित समुदायों के 1.2 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा मिल रही है। संस्था के नदी पुनर्जीवन अभियानों से 75 नदियाँ और सहायक धाराएँ पुनर्जीवित हुई हैं, जिससे 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ पहुँचा है। वहीं प्राकृतिक खेती कार्यक्रमों से 30 लाख किसानों तक पहुँच बनाते हुए ऋण बोझ कम करने, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और आजीविका सुदृढ़ करने में मदद मिली है।
संस्था के 45वें स्थापना वर्ष में प्रवेश के इस अवसर पर माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की उपस्थिति में आयोजित विशेष सत्संग ने गुरुदेव के उस सरल संदेश को पुनः रेखांकित किया कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन तभी संभव है, जब व्यक्ति भीतर से शांत हो।

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