विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल ने
पावर कॉरपोरेशन द्वारा शीर्ष पद पर की गई नियुक्ति को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए

देहरादून नैनीताल। विधानसभा सत्र के दौरान मैंने एम.डी., पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के शीर्ष पद पर की गई नियुक्ति को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए थे। उस समय सरकार का स्पष्ट जवाब था कि नियुक्ति “नियम सम्मत” ढंग से की गई है। लेकिन अब न्यायालय के निर्णय के पश्चात सरकार का मौन रहना कई शंकाओं को जन्म देता है। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था, तो फिर न्यायालय को हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा? और यदि न्यायालय ने नियुक्ति पर प्रश्न खड़े किए हैं, तो सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
प्रदेश की जनता जानना चाहती है—
• क्या चयन प्रक्रिया पारदर्शी थी?
• क्या पात्रता और वरिष्ठता के मानकों का पालन हुआ?
• यदि त्रुटि हुई है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
लोकतंत्र में जवाबदेही सर्वोपरि होती है। सरकार का दायित्व है कि वह इस विषय पर स्पष्ट और तथ्यात्मक उत्तर दे। मौन धारण कर लेने से प्रश्न समाप्त नहीं होते, बल्कि और गहरे हो जाते हैं।
प्रदेशहित में सरकार को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।




















